असम में कांग्रेस-रायजोर दल गठबंधन टूटा, अखिल गोगोई ने नेताओं के ‘अहंकार’ को ठहराया जिम्मेदार

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गुवाहाटी, 8 मार्च (आईएएनएस)। असम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी राजनीति को बड़ा झटका लगा है। अखिल गोगोई ने रविवार को घोषणा की कि उनकी पार्टी रायजोर दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (एआईसीसी) के बीच प्रस्तावित गठबंधन औपचारिक रूप से टूट गया है।

शिवसागर से विधायक और रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने इस टूट का जिम्मेदार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन को ठहराया और कहा कि उनके “अहंकार” के कारण सीट बंटवारे की बातचीत पटरी से उतर गई।

पत्रकारों से बातचीत में अखिल गोगोई ने कहा कि गठबंधन मुख्य रूप से सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेदों के कारण टूट गया, खासकर एक विधानसभा क्षेत्र को लेकर विवाद ने बातचीत को पूरी तरह प्रभावित किया।

उन्होंने बताया कि कई दौर की चर्चाओं के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व उनकी पार्टी को पहले दिए गए आश्वासनों का सम्मान करने में विफल रहा। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने ही गठबंधन का प्रस्ताव लेकर उनसे संपर्क किया था और समर्थन मांगा था।

गोगोई ने कहा कि उनकी पार्टी ने केवल 15 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग रखी थी, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व रायजोर दल को केवल नौ सीटें देने के लिए तैयार था, जिसे उनकी पार्टी ने अस्वीकार्य बताया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पहले ही संकेत दिया था कि गठबंधन व्यवस्था के तहत ढींग विधानसभा क्षेत्र रायजोर दल को दिया जाएगा। उनके अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने भी बातचीत के दौरान यही आश्वासन दिया था।

अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि एआईसीसी और प्रद्युत बोरदोलोई दोनों ने उनकी पार्टी को बताया था कि ढींग विधानसभा सीट उन्हें दी जाएगी, लेकिन बाद में गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन ने इस पर सहमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इसी सीट को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण दोनों दलों के बीच प्रस्तावित गठबंधन अंततः टूट गया।

रायजोर दल प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि दलगांव में प्रस्तावित गठबंधन के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त नहीं था।

उनके मुताबिक यह विरोध असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सीधे निर्देशों के तहत किया गया था। उन्होंने दावा किया कि दलगांव में प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ता असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व के निर्देशों पर ही कार्रवाई कर रहे थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम असम में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका है। राज्य में भाजपा विरोधी दलों के बीच व्यापक गठबंधन बनाने की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन बातचीत विफल होने के बाद अब रायजोर दल के स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरने की संभावना बढ़ गई है।