नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। देश में करेंसी सर्कुलेशन में 10,20 और 50 रुपए के नोटों की कोई कमी नहीं है। यह जानकारी सरकार की ओर से मंगलवार को संसद में दी गई।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि आरबीआई के अनुसार, कम मूल्य के नोट परंपरागत रूप से एटीएम के माध्यम से नहीं दिए जाते रहे हैं।
उन्होंने सदन को सूचित किया, “कम मूल्यवर्ग के नोटों को छोटे मूल्य के नोट वितरकों के माध्यम से वितरित करने के लिए एक पायलय प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।”
सरकार के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (26 फरवरी तक) में केंद्रीय बैंक द्वारा 10 रुपए के 439.40 करोड़ नोट, 20 रुपए के 193.70 करोड़ नोट और 50 रुपए के 130.30 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई है।
पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2025) में 10 रुपए के 180 करोड़ नोट, 20 रुपए के 150 करोड़ नोट और 50 रुपए के 300 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई थी।
आरबीआई, एक सतत प्रक्रिया के तहत, विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों की आवश्यकता का आकलन करता है और सरकार को आवश्यक मूल्यवर्ग के नोटों के मिश्रण की सलाह देती है।
कम मूल्य के मुद्रा की मांग नोटों और सिक्कों के मिश्रण से पूरी की जाती है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान माध्यम कुल लेन-देन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें कम मूल्य के लेन-देन भी शामिल हैं।
एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री जी ने कहा कि नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (31 दिसंबर, 2025 तक) में रुपे केसीसी कार्ड के माध्यम से कुल 3.72 लाख डिजिटल लेनदेन हुए हैं, जिनका मूल्य 111.17 करोड़ रुपए है।
केसीसी के तहत सभी पात्र किसानों को दी जाने वाली ऋण सीमा फसलों के वित्तपोषण के पैमाने, खेती योग्य क्षेत्र, फसल पैटर्न और संबंधित आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित की जाती है।

