बेंगलुरु, 13 मार्च (आईएएनएस)। राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर बेंगलुरु के बाहरी इलाके में एक रिसॉर्ट में ठहरे ओडिशा के विधायकों के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पार्टी ऑपरेशन लोटस की रचयिता है और ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ (खरीद-फरोख्त) के लिए जानी जाती है।
दरअसल, शिवकुमार विधान सौध परिसर में और बाद में बिदादी के पास एक रिसॉर्ट में मीडिया के सवालों के जवाब दे रहे थे।
जब उनसे रामनगर के एक रिसॉर्ट में ठहरे ओडिशा के विधायकों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “राजनीतिक पार्टियों को हमेशा विधायकों की खरीद-फरोख्त का डर बना रहता है। राजनीति में सभी पार्टियों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। चूंकि वे यहां आए हैं, इसलिए उन्हें सहयोग देना हमारा फर्ज है। हमारे विधायकों और मैंने उनसे मुलाकात की है।”
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की इस टिप्पणी पर कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है, शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ऐसा है, तो उन्होंने कर्नाटक में ‘ऑपरेशन लोटस’ क्यों चलाया था?
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह पार्टी आलाकमान द्वारा सौंपा गया कोई काम था, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई काम नहीं है। चूंकि राज्यसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, इसलिए ‘ऑपरेशन लोटस’ का डर बना हुआ है। हमारे विधायकों पर दबाव डाला जा रहा है और उन्हें बड़े-बड़े प्रलोभन दिए जा रहे हैं। लगभग 14-15 विधायक यहां आए हुए हैं। ओडिशा पीसीसी अध्यक्ष ने फोन करके बताया कि सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियां एकजुट हो गई हैं और ‘ऑपरेशन लोटस’ होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि जब पार्टी अध्यक्ष बुलाते हैं, तो उनका सम्मान करना हमारा फर्ज है। मैंने उनसे यहां आने को कहा क्योंकि यहाँ का माहौल अच्छा है। सभी विधायक खुश हैं। कुछ नए लोग भी आए हैं। वे खुद आए हैं और यहीं रुके हुए हैं। हम उनकी देखभाल कर रहे हैं। बीजद, कम्युनिस्ट पार्टी और हमने मिलकर ओडिशा में एक उम्मीदवार खड़ा किया है। भाजपा जो चाहेगी, वह करेगी और हमें जो करना है, हम वह करेंगे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या एक समस्या-समाधानकर्ता के तौर पर उनकी भूमिका अब खत्म हो गई है, तो शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस विधायक मगदी बालकृष्ण और कांग्रेस सांसद सीपी योगेश्वर वहां मौजूद हैं। उनके अनुभव को देखते हुए हमने उन्हें पूरी आजादी दी है। उनकी भी अपनी कुछ जिम्मेदारियां हैं। हमारे जिले के सभी विधायकों की भी अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं।
उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या सभी की रक्षा करना हमारा फर्ज नहीं है? कोई आए या न आए, यह एक अलग बात है। कोई भी वहां नहीं आ सकता; कोई उन तक पहुंच भी नहीं सकता, न ही उनसे बात कर सकता है। इसके लिए वहाँ कोई गुंजाइश ही नहीं है।
जब उन्हें याद दिलाया गया कि गुजरात चुनावों के दौरान भी उन्होंने इसी तरह पार्टी की मदद की थी और जब उनसे पूछा गया कि क्या अब उनकी अपनी राजनीतिक आकांक्षाएं पूरी होंगी, इस पर उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। चलिए, इंतजार करते हैं और देखते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस घटनाक्रम से वे अपने राजनीतिक लक्ष्यों के और करीब पहुंचेंगे, इस पर उन्होंने कहा, “मैं क्यों कोई सपना देखूं? जहां कड़ी मेहनत होती है, वहां नतीजे भी जरूर मिलते हैं।”

