भोपाल, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को बताया कि इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के लिए रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है।
पंजीकृत रकबा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 41.58 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है।
मंत्री राजपूत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए सभी व्यवस्थाएं समय पर की जा रही हैं। उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार है और किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने बताया कि इस वर्ष सरकार किसानों को गेहूं पर 2,585 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी के साथ अतिरिक्त 40 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ भी दे रही है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
राजपूत ने कहा कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए खरीद प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। 10 अप्रैल 2026 से देवास, मंदसौर, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में खरीद शुरू होगी, जबकि शेष संभागों में 15 अप्रैल 2026 से खरीद आरंभ होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि राजस्व विभाग किसानों के पंजीकृत भूमि रिकॉर्ड का तेजी से सत्यापन कर रहा है। सत्यापन पूरा होते ही स्केल-टू-स्टॉक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे किसान बिना किसी परेशानी के अपनी उपज जमा कर सकेंगे।
मंत्री ने बताया कि इस वर्ष सरकार ने 78 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल लगभग 77 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर की गई थी।
बारदाना (गननी बैग) की समस्या पर उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को अतिरिक्त 50,000 जूट बैग उपलब्ध कराए हैं। साथ ही एचडीपीई/पीपी बैग और सिंगल-यूज बैग की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि खरीद शुरू होने से पहले पर्याप्त बारदाना उपलब्ध रहेगा।
उन्होंने बताया कि जिन गोदामों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत क्षमता को 120 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार मार्च-अप्रैल से मई-जून 2026 तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना लागू की जाएगी, जिससे 10 लाख टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण स्थान उपलब्ध होगा।
राजपूत ने कहा कि मध्य प्रदेश के पास देश में सबसे अधिक कवर स्टोरेज क्षमता है, जो करीब 400 लाख टन है। इसमें से 103 लाख टन अभी खाली है, जो इस वर्ष के खरीद लक्ष्य के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर असर के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नियमित बनी हुई है और राज्य में किसी प्रकार की कमी नहीं है।
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार गेहूं खरीद में देरी के लिए युद्ध का बहाना बना रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के लिए 10 करोड़ गननी बैग की आवश्यकता थी, लेकिन राज्य सरकार ने केवल 2.6 करोड़ बैग का ही ऑर्डर दिया, जिससे करीब 7.5 करोड़ बैग की भारी कमी हो गई।
पटवारी ने स्पष्ट किया कि जूट अधिनियम के तहत राज्य सरकार को समय पर अपनी आवश्यकता केंद्र को भेजकर अग्रिम भुगतान करना होता है, लेकिन सरकार ऐसा करने में विफल रही, जिसके कारण जूट के बारदाने की कमी उत्पन्न हुई।
उन्होंने कहा, “यह कमी किसी युद्ध या बाहरी कारण से नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही और निष्क्रियता का परिणाम है। यह पूरी तरह से सरकार द्वारा पैदा किया गया संकट है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत बांग्लादेश के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जूट उत्पादक देश है, इसलिए युद्ध के कारण कमी होती तो उसका असर प्लास्टिक (पीपी) बैग पर पड़ता, न कि जूट के बोरो पर।
पटवारी ने आरोप लगाया कि खरीद तिथियों को बार-बार टालने, 16 मार्च से 1 अप्रैल, फिर 10 अप्रैल और आगे भी संभावित देरी के कारण किसानों को अपनी उपज व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे लगभग 50 प्रतिशत किसान कर्ज चुकाने में चूक (डिफॉल्ट) की स्थिति में पहुंच गए हैं।


