कोच्चि, 17 मार्च (आईएएनएस)। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा एक बार फिर केरल की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने इस मामले पर राज्य सरकार को घेरते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जवाब मांगा है।
कोच्चि में केरल पुलैयार महासभा के कार्यक्रम में बोलते हुए वेणुगोपाल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में साफ रुख नहीं अपना रही है। उनका कहना है कि कई मौकों के बावजूद सरकार यह नहीं बता पाई कि वह सभी उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के पक्ष में है या विरोध में।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब एक अभिनेता के मामले में भावनाएं आहत हुई थीं, तब उन्होंने माफी मांगी थी, लेकिन सबरीमाला जैसे धार्मिक और आस्था से जुड़े मुद्दे पर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची, उस पर अब तक कोई माफी क्यों नहीं आई?
वेणुगोपाल ने यह भी सवाल उठाया कि सबरीमाला विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन श्रद्धालुओं पर केस दर्ज किए गए थे, उन्हें अब तक वापस क्यों नहीं लिया गया और प्रभावित लोगों को मुआवजा क्यों नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि सरकार इस पूरे मामले में जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने पुराने हलफनामों का जिक्र करते हुए कहा कि 2016 की सरकार ने भी बिना किसी नए सिरे से विचार किए 2007 में वी.एस. च्युतानंदन की सरकार के रुख को ही आगे बढ़ाया।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि सरकार का यह कहना कि वह धार्मिक विद्वानों की राय लेगी और फैसला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ देगी, दरअसल एक तरह से जिम्मेदारी से बचना है। उन्होंने इस तर्क की भी आलोचना की कि सरकार चाहे तो कानून बना सकती है, लेकिन उसने अब तक कोई ठोस रुख नहीं दिखाया।
कांग्रेस का रुख दोहराते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ नहीं है, लेकिन मंदिर की परंपराओं और रीति-रिवाजों को नजरअंदाज करके कोई फैसला नहीं होना चाहिए। इस मुद्दे को सीधे तौर पर लैंगिक समानता से जोड़ना सही नहीं है, क्योंकि यह आस्था और परंपरा से भी जुड़ा मामला है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जनता को साफ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब चाहिए। अगर सरकार ऐसा नहीं करती, तो चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।
राज्य में 9 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे आएंगे, ऐसे में सबरीमाला विवाद फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

