चेन्नई, 16 मार्च (आईएएनएस)। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) में सीटों के बंटवारे को लेकर तनातनी होती दिख रही है। ऐसी स्थिति पुराने सहयोगी दलों द्वारा ज्यादा सीटें मांगने की वजह से बन रही है।
वामपंथी दलों और छोटे सहयोगी दलों के नेताओं ने डीएमके नेतृत्व को अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए तर्क दिया है कि 2021 के चुनाव में उनके चुनावी प्रदर्शन और जमीनी स्तर पर उपस्थिति को देखते हुए उनकी सीटें बढ़ाई जानी चाहिए।
ये चर्चाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब गठबंधन का विस्तार हुआ है, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का वितरण अधिक जटिल हो गया है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) दोनों ने ही ज्यादा सीटें मांगी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने छह-छह सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों ने दो-दो सीटें जीतीं।
वामपंथी दलों के सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने सुझाव दिया है कि वे इस बार पांच-पांच सीटों पर चुनाव लड़ें।
सीपीआई और सीपीआईएम के नेताओं ने सप्ताहांत में आंतरिक परामर्शों के बाद उन्होंने अपने विकल्पों का मूल्यांकन किया और आगे की रणनीति पर चर्चा की।
हालांकि उन्होंने गठबंधन में बने रहने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया है कि वे 2021 में जिन सीटों पर चुनाव लड़े थे, कम से कम उतनी ही सीटें बरकरार रखने के इच्छुक हैं।
एक अन्य सहयोगी दल, टीवीके ने भी सीट आवंटन संबंधी चर्चाओं पर असंतोष व्यक्त किया है।
पार्टी नेता टी. वेलमुरुगन ने कहा कि अगर उन्हें फिर से केवल एक ही निर्वाचन क्षेत्र की पेशकश की जाती है तो पार्टी नेतृत्व डीएमके के साथ अपने गठबंधन पर पुनर्विचार कर रहा है।
टी वेलमुरुगन ने पत्रकारों से कहा कि हमने अतिरिक्त सीटों की मांग की है, लेकिन डीएमके की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इन परिस्थितियों में हमारी पार्टी की उच्च स्तरीय समिति के कई सदस्यों का मानना है कि हमें केवल एक सीट के लिए गठबंधन में बने रहने के बारे में पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने डीएमके नेतृत्व को दस मांगों का एक सेट भी सौंपा है और वह प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रही है।

