नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। चक्रीय अर्थव्यवस्था और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों को एकीकृत करते हुए, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे, जिनमें इफिसिएंट वेस्ट सेग्रीगेशन एंड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह जानकारी सोमवार को लोकसभा को दी गई।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के तहत सॉलिड वेस्ट को स्रोत पर ही चार भागों में अलग करना अनिवार्य है।
कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि इन नियमों के तहत सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के सभी चरणों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है।
इन नियमों में शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के लिए विशिष्ट भूमिकाएं और उत्तरदायित्व निर्धारित किए गए हैं।
राज्य मंत्री ने बताया कि नियमों के अनुसार, सीमेंट संयंत्रों और अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्रों सहित औद्योगिक इकाइयों के लिए अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) के उपयोग के लिए ईंधन प्रतिस्थापन दर को वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर छह वर्ष की अवधि में 15 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग एंड डिस्पोजल फैसिलिटी के लिए भूमि के त्वरित आवंटन को सुगम बनाने के लिए, नियमों में विकास के लिए श्रेणीबद्ध मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग एंड डिस्पोजल फैसिलिटी सुविधाओं के लिए रिपोर्ट ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि नियमों के तहत वेस्ट प्रोसेसिंग फैसिलिटी का भी ऑडिट किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि नियमों में पुराने कचरे के निपटान के लिए समयबद्ध कार्य योजना विकसित करने और उसे लागू करने तथा ठोस कचरे के लैंडफिलिंग पर प्रतिबंधों को और मजबूत करने का भी प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने के प्रावधान के अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।




