वाशिंगटन, 4 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहे मौजूदा संघर्ष का सबसे खराब नतीजा यह हो सकता है कि तेहरान में फिर से कोई कट्टरपंथी नेतृत्व सत्ता में आ जाए। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी भविष्य में राजनीतिक बदलाव के दौरान एक विकल्प हो सकते हैं।
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का मुख्य ध्यान ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने पर है। लेकिन इसके साथ ही यह भी सोचा जा रहा है कि अगर मौजूदा नेतृत्व गिर जाता है तो उसके बाद क्या होगा।
ट्रंप ने कहा, “सबसे खराब स्थिति यह हो सकती है कि हम यह सब करें और उसके बाद कोई ऐसा व्यक्ति सत्ता में आ जाए जो पहले वाले से भी उतना ही खराब हो।”
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति से बचना जरूरी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि अगर ईरान में नेतृत्व बदले तो वह आम लोगों के लिए बेहतर साबित हो, न कि कोई और कट्टर सरकार बन जाए।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि वहां ऐसा नेता आए जो देश को लोगों के लिए बेहतर दिशा में ले जाए। अब देखना होगा कि लोग क्या फैसला करते हैं। उनके पास भी मौका है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या निर्वासित ईरानी क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी भविष्य में ईरान के नेता बन सकते हैं, तो ट्रंप ने इस संभावना से इनकार नहीं किया।
ट्रंप ने कहा, “मुमकिन है। कुछ लोग उन्हें पसंद भी करते हैं। हालांकि हमने इस बारे में ज्यादा विचार नहीं किया है।”
हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि संभव है कि ईरान के अंदर से ही कोई नेता उभरकर सामने आए, जो ज्यादा उपयुक्त हो।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि देश के अंदर से आने वाला कोई व्यक्ति ज्यादा सही हो सकता है। अगर कोई ऐसा व्यक्ति हो जो इस समय ईरान में लोकप्रिय हो, तो उसके लिए नेतृत्व संभालना आसान हो सकता है।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि हाल में हुए सैन्य हमलों से ईरान के नेतृत्व ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों के बारे में हम सोच रहे थे, उनमें से ज्यादातर अब मारे जा चुके हैं। हमने उस समूह में से कुछ लोगों के बारे में सोचा था, लेकिन वे अब मारे जा चुके हैं। अब हमारे पास एक और समूह है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे भी मारे जा सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे सैन्य हमलों का निशाना ईरान का नेतृत्व और उसकी सैन्य संरचना है। ट्रंप ने कहा, “लगता है कि अब आने वाले हमलों में जल्द ही ऐसा समय आ सकता है जब हमें वहां किसी को पहचानना भी मुश्किल हो जाएगा।”
जर्मन चांसलर मर्ज़ ने कहा कि बर्लिन और वॉशिंगटन इस बात पर एकमत हैं कि तेहरान में मौजूदा लीडरशिप के बाद क्या होगा, इस पर विचार करने की ज़रूरत है।
मर्ज़ ने कहा, “तेहरान में इस भयानक शासन को हटाने के मामले में हम एक ही पेज पर हैं, और हम अगले दिन के बारे में बात करेंगे, कि अगर वे चले गए तो क्या होगा।”
जर्मन नेता ने कहा कि यूरोप भी इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक रणनीति बनाने में अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि मौजूदा शासन के बाद की स्थिति से कैसे निपटा जाएगा।”
गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में अमेरिका ने ईरान की सैन्य और परमाणु ढांचे को निशाना बनाते हुए अपने सैन्य अभियान तेज कर दिए हैं। इससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।

