नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि भले ही अमेरिकी सैन्य अभियानों में सामरिक स्तर पर बड़ी सफलता दिखाई दे रही हो, लेकिन ट्रंप सरकार का ईरान के साथ युद्ध बिना किसी स्पष्ट रणनीतिक मकसद के भटक सकता है।
सीएनएन के फरीद जकारिया जीपीएस पर सुलिवन ने कहा कि अमेरिकी सेना का ऑपरेशनल प्रदर्शन शानदार रहा है। हालांकि, उन्होंने युद्ध के आखिरी लक्ष्यों की स्पष्टता पर भी सवाल उठाया। सुलिवन ने कहा, “अच्छी बात यह है कि अमेरिकी सेना बस कमाल की है। यह टैक्टिकल मकसद हासिल करने, स्किल, प्रोफेशनलिज्म और हिम्मत के साथ ऑपरेशन करने में कमाल की है।”
इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि युद्ध का रणनीतिक मकसद अभी भी स्पष्ट नहीं है। सुलिवन ने कहा, “निराशाजनक बात यह है कि हम अमेरिकी सेना से खुद को खतरे में डालने के लिए कह रहे हैं और हम पहले ही छह सेवा सदस्य खो चुके हैं, जो पूरी तरह से साफ मकसद की ओर इशारा करते हैं।”
उनके मुताबिक सरकार ने युद्ध के आखिरी नतीजे को साफ तौर पर बताए बिना कई वजहें बताई हैं। उन्होंने कहा, “सरकार साफ तौर पर बिल्कुल भी यह नहीं कह पाई है कि इस युद्ध का आखिरी मकसद क्या है? अधिकारियों ने शायद एक दर्जन अलग-अलग वजहें दी हैं, जो हर घंटे बदलती रहती हैं। इतनी उलझन, मुझे लगता है कि एक बहुत बड़ी चुनौती है। इससे पता चलता है कि यह लड़ाई बिना पूरी तरह सोचे-समझे शुरू कर दी गई।”
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ट्रंप सरकार ने वेनेजुएला में अमेरिकी स्पेशल फोर्स के पिछले ऑपरेशन से गलत सबक लिया है। सुलिवन ने पहले के हमले का जिक्र करते हुए कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप इससे गलत सबक लेंगे। उन्हें लगेगा कि हम कहीं भी, कभी भी, किसी भी मकसद के लिए सैन्य फोर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं और सब ठीक हो जाएगा।”
सुलिवन ने कहा कि इस युद्ध के अनचाहे भूराजनीतिक नतीजे भी हो सकते हैं, खासकर रूस को फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा, “रूस अमेरिका का दुश्मन है। वे एक ऐसे दुश्मन हैं जो, कथित तौर पर, असल में इंटेलिजेंस सप्लाई कर रहे हैं ताकि ईरान उन जगहों का पता लगा सके जहां अमेरिकी सेवा सदस्य मौजूद हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि रूस को इस लड़ाई से फंडिंग और रणनीति दोनों तरह से फायदा हो सकता है। सुलिवन ने कहा, “इस सब में सबसे बड़े विजेताओं में से एक व्लादिमीर पुतिन और रूस हैं।” इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने तेल की बढ़ती कीमतों और यूक्रेन के लिए मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों में कमी की ओर इशारा किया।
सुलिवन का कहना था कि मध्य पूर्व में युद्ध शुरू करने के निर्णय ने रूस के खिलाफ यूक्रेन की रक्षात्मक स्थिति को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा, “बातचीत के एक महत्वपूर्ण दौर में, जब राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन को बड़ा समर्थन दे सकते थे, उस समय उन्होंने इसके बजाय मध्य पूर्व में यह बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने का फैसला किया।”
उन्होंने आगे कहा कि इस युद्ध से खतरनाक भू-राजनीतिक मिसालें और मजबूत होने का खतरा है। सुलिवन ने कहा, “मुझे लगता है कि वे दो बड़े सबक ले रहे हैं। बड़ा स्ट्रेटेजिक सबक यह है कि हम भू-राजनीति के एक नए दौर में हैं, जहां बड़े देश बिना किसी अंतरराष्ट्रीय कानून के रेफरेंस के ताकत से काम कर सकते हैं।”
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा, “मुझे लगता है कि इससे उन्हें यकीन हो जाएगा कि उनके पास ताइवान के खिलाफ सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने का ज्यादा मौका है।”

