पलक्कड़ , 20 मार्च (आईएएनएस)। केरल के पलक्कड़ जिले की ओट्टापलम विधानसभा सीट, जो आमतौर पर एकतरफा मानी जाती रही है, इस बार 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव में बेहद दिलचस्प मुकाबले का केंद्र बन गई है। यहां त्रिकोणीय मुकाबले में दल बदलने वाले नेता, एक फिल्मी शख्सियत और मौजूदा विधायक आमने-सामने हैं।
इस मुकाबले के केंद्र में हैं पी.के. सासी, जो कभी माकपा के प्रभावशाली नेता रहे हैं और 2016 में शोरनूर सीट से विधायक चुने गए थे। 2021 में पार्टी के अंदरूनी विवादों के चलते उन्हें टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्हें केरल स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का चेयरमैन बनाया गया था। हालांकि, पिछले महीने उन्होंने इस पद से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ दी।
अब सासी ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। कांग्रेस नेतृत्व ने भी उन्हें समर्थन दे दिया है। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले सासी पिछले एक साल में खासकर पलक्कड़ क्षेत्र में माकपा से नाराज कार्यकर्ताओं के बीच एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं।
इस सीट पर मुकाबले को और दिलचस्प बना रहे हैं भाजपा उम्मीदवार मेजर रवि। पूर्व एनएसजी कमांडो रह चुके रवि, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों का पीछा करने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं। सेना से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने मलयालम सिनेमा में अपनी पहचान बनाई और सुपरस्टार मोहनलाल के साथ कई सैन्य आधारित फिल्मों में काम किया।
रवि का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरुआती दौर में भाजपा के करीब रहने के बाद वह कुछ समय के लिए कांग्रेस के संपर्क में भी रहे, लेकिन 2023 में औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। उनकी पहचान मजबूत है, लेकिन उसे वोट में बदलना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
वहीं, माकपा की ओर से मौजूदा विधायक के. प्रेमकुमार मैदान में हैं, जो स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। पारंपरिक रूप से वामपंथ का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर उन्हें संगठनात्मक बढ़त जरूर है, लेकिन सासी के बगावती रुख के चलते पार्टी के भीतर असंतोष ने उनकी राह थोड़ी मुश्किल कर दी है।
कांग्रेस, जो पिछले 25 सालों से इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई है, सासी के सहारे माकपा के किले में सेंध लगाने की उम्मीद कर रही है। पिछले चुनावों में जीत का अंतर 13 से 15 हजार वोटों के बीच रहा है; ऐसे में मामूली वोट स्विंग भी परिणाम बदल सकता है।
ओट्टापलम में इस बार मुकाबला वफादारी बनाम बगावत, लोकप्रियता बनाम संगठन और स्टार पावर बनाम जमीनी समीकरणों की कड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

