कृष्णगिरि में दो वर्षीय बच्ची की हत्या पर टीवीके और पीएमके का डीएमके पर हमला, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग

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चेन्नई, 28 फरवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु के कृष्णगिरि जिले में दो वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम (टीवीके) और पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार की कड़ी आलोचना की है और मामले की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग की है।

टीवीके ने शनिवार को जारी बयान में घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे “जघन्य और अक्षम्य कृत्य” बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार आरोपी डीएमके की युवा इकाई में यूनियन स्तर का पदाधिकारी था।

पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग यह समझने लगे हैं कि वे कानून से बच सकते हैं। टीवीके ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोग कानूनी परिणामों के भय के बिना काम कर रहे हैं।

टीवीके ने राज्य सरकार से मांग की कि जांच बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के निष्पक्ष ढंग से की जाए और मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, आरोपी दोषी पाए जाने पर उसे कानून के तहत अधिकतम सजा देने की मांग की।

इधर, पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने भी इस घटना की निंदा की और आरोप लगाया कि आरोपी डीएमके युवा विंग से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि डीएमके के दोबारा सत्ता में आने के बाद राज्य में अपराध दर में वृद्धि हुई है।

अनबुमणि रामदास ने आरोप लगाया कि राज्य में दुष्कर्म, हत्या और लूट जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है और सत्ताधारी दल के कुछ सदस्य ऐसे व्यवहार कर रहे हैं मानो उन्हें अपराध करने का “लाइसेंस” मिल गया हो।

उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने पार्टी से जुड़े गलत कार्यों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी। रामदास ने आरोप लगाया कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल रही है।

पीएमके नेता ने यह भी दावा किया कि मौजूदा सरकार के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में तेज वृद्धि हुई है तथा राज्य में नशीले पदार्थों का प्रसार भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार की है।

इस घटना के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और विपक्षी दल कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुट गए हैं।