नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) से मार्च में रिकॉर्ड 22.64 अरब लेनदेन हुए हैं। यह किसी एक महीने में यूपीआई से हुए लेनदेन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेनदेन की मात्रा में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से बुधवार को दी गई।
इससे पहले फरवरी 20.39 अरब लेनदेन हुए थे। वहीं, जनवरी में यूपीआई से 21.70 अरब लेनदेन हुए थे।
मार्च में लेनदेन की वैल्यू में भी सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान यूपीआई से कुल 29.53 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। फरवरी में यह आंकड़ा 26.84 लाख करोड़ रुपए था। जनवरी में यूपीआई से हुए कुल लेनदेन की वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपए थी।
दैनिक लेनदेन की औसत संख्या में मार्च में मामूली वृद्धि दर्ज की गई और यह फरवरी के 728 मिलियन की तुलना में बढ़कर 730 मिलियन हो गई।
हालांकि, दैनिक लेनदेन का औसत मूल्य पिछले महीने के 95,865 करोड़ रुपए से थोड़ा घटकर 95,243 करोड़ रुपए रह गया।
यूपीआई ऐप्स में, फरवरी में लेनदेन की मात्रा के हिसाब से 45.5 प्रतिशत के साथ फोनपे का दबदबा रहा। गूगल पे लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पेटीएम लगभग 7 से 8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में सक्रिय है, जिससे भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी देश के रूप में उभर रहा है। यूपीआई की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति से प्रेषण में वृद्धि हो रही है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है।
भारत के वित्त मंत्रालय द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, यूपीआई भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभरा है, जो भारत में कुल भुगतान लेनदेन का 57 प्रतिशत है, और नकद लेनदेन (38 प्रतिशत) से कहीं अधिक है। इसका मुख्य कारण उपयोग में आसानी और तेज धन हस्तांतरण की क्षमता है।


