नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अज़ार ने कहा है कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान को मध्यस्थ (फैसिलिटेटर) के तौर पर चुना है और इजरायल को वॉशिंगटन के इस फैसले पर भरोसा है, बशर्ते 15 सूत्रीय योजना को लागू किया जाए।
आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अजार ने कहा, “हमने पाकिस्तान को सीधे युद्ध में शामिल होते नहीं देखा, लेकिन उनकी भूमिका सकारात्मक नहीं रही है। अमेरिका ने अपने कारणों से उन्हें मध्यस्थ बनाया है। हमें भरोसा है कि अमेरिका 15 बिंदुओं की योजना को लागू करेगा।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम के लिए पाकिस्तान को माध्यम बनाया है। इसके तहत इस्लामाबाद ने अमेरिका की ओर से तैयार 15 बिंदुओं की योजना तेहरान तक पहुंचाई और ईरान के जवाब भी अमेरिका तक पहुंचाए।
अजार ने कहा कि “अस्तित्वगत खतरों”, खासकर ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करने के बाद अब इजरायल को उम्मीद है कि ईरानी शासन अमेरिका के साथ व्यापक शांति योजना पर सहयोग करेगा।
उन्होंने कहा, “हम संतुष्ट हैं कि हमारा सैन्य अभियान पूरा हो चुका है और अब कूटनीति को मौका दिया जा रहा है। अगर ईरान इस 15 सूत्रीय योजना पर सहयोग करता है, तो न केवल उसे राहत मिलेगी बल्कि पूरे क्षेत्र को फायदा होगा।”
इजरायली राजदूत ने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान युद्धविराम का सम्मान नहीं करता या फिर टालमटोल करता है, तो इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
अजार ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को काफी हद तक खत्म कर दिया है और उसके कार्यक्रम को वर्षों पीछे धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित रूप से हटाने और संवर्धन गतिविधियों को रोकने तक स्थिति की निगरानी जारी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अंदरूनी हालात कमजोर पड़ते दिख रहे हैं और सत्ता तंत्र में दरारें नजर आ रही हैं। अजार के अनुसार, “शासन और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल की कमी है और यह अस्थिरता की ओर इशारा करता है।”

