ग्रामीण विकास में अधिक कार्य गारंटी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वीबी जीराम जी लागू: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री

0
5

अगरतला, 11 फरवरी (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बुधवार को कहा कि वीबी जीराम जी अधिनियम को ग्रामीण विकास और पारदर्शिता पर स्पष्ट फोकस के साथ लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार को न्यूनतम करना भी है।

मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में आयोजित वीबी जीराम जी के राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग की कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में वीबी जीराम जी अधिनियम लागू होने के बाद विपक्षी दलों ने लोगों को गुमराह करने के लिए दुष्प्रचार करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, “यह अधिनियम ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर बनाया गया है। पहले भी कई योजनाओं के नाम बदले गए, लेकिन तब विपक्ष चुप रहा। यदि गांवों का विकास नहीं होगा तो राज्य और देश आगे नहीं बढ़ सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं और ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की बात करते हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की मनरेगा योजना में कई कमियां थीं, जिनमें बिचौलियों की भूमिका प्रमुख थी, जिससे श्रमिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा, “श्रमिकों को बिचौलियों और भ्रष्टाचार से बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने वीबी जीराम जी विधेयक, 2025 पेश किया।”

साहा ने आगे कहा कि विपक्ष वीबी जीराम जी का पूरा नाम- ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ समझने में विफल रहा और संसद में अनावश्यक हंगामा किया, जबकि विधेयक पारित होकर अधिनियम बन चुका है।

उन्होंने कहा, “इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य मनरेगा की कमियों को दूर करना है। यह बदलाव जरूरी था। इससे अधिक कार्य गारंटी और ग्रामीण विकास के लिए बेहतर वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित होंगे। यह अधिनियम टिकाऊ आधारभूत संरचना निर्माण और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर देता है। पहले रोजगार के नाम पर श्रमिकों को अक्सर गुमराह किया जाता था।”

पारदर्शिता के उपायों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल ट्रैकिंग और भ्रष्टाचार में कमी लाना इस अधिनियम को लाने के प्रमुख कारणों में शामिल है। उन्होंने कहा, “यह कानून ग्रामीण रोजगार और विकास के प्रति भारत के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। पहले 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित था, अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।”

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वीबी जीराम जी के तहत अगले पांच वर्षों में ग्रामीण भारत में 10 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह योजना ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान करती है और समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

चौहान ने योजना की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वीबी जीराम जी के तहत 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया गया है, जो पहले 100 दिन था। उन्होंने बताया कि ग्रामीण कार्यक्रम के लिए 1,51,282 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि वित्त आयोग के माध्यम से अतिरिक्त 55,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस प्रकार कुल वार्षिक आवंटन 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा।

कार्यक्रम में सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब, वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय, पर्यटन मंत्री सुषांत चौधरी, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री टिंकू रॉय, एआरडीडी एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री सुधांशु दास, पंचायत मंत्री किशोर बर्मन, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संताना चकमा, विधायकगण, सचिव अभिषेक सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।