कोलंबो, 21 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व तनाव की वजह से ईंधन संकट की आशंका दुनिया के कई देशों ने जतानी शुरू कर दी है। इस बीच श्रीलंका के चिकित्सकों और हेल्थ वर्कर्स ने एक चेतावनी जारी की है।
प्रमुख दैनिक डेली मिरर के अनुसार, चिकित्सकों समेत स्वास्थ्यकर्मियों ने अगले 48 घंटों को बहुत अहम बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर फ्यूल और ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कतों को दूर करने के लिए तुरंत कोई उपाय नहीं किया गया, तो आने वाले एक हफ्ते में श्रीलंका के हॉस्पिटल सिस्टम पर बहुत बुरा असर पड़ेगा; वह ठप भी हो सकता है।
मेडिकल प्रोफेशनल्स ने इस बात पर जोर दिया कि हेल्थकेयर सर्विस को लगातार बनाए रखने के लिए अस्पताल में आना-जाना जरूरी है। हालांकि, चल रहे फ्यूल संकट ने ड्यूटी पर आने की कोशिश कर रहे हेल्थ स्टाफ के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें दूसरे पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के उलट, ऑफिशियल ट्रांसपोर्ट या फ्यूल अलाउंस नहीं दिए जाते हैं, और उन्हें नियमित ड्यूटी, स्टैंडबाय शिफ्ट और इमरजेंसी कॉल के लिए अपने ट्रांसपोर्ट का इंतजाम खुद करना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा क्यूआर-बेस्ड फ्यूल राशनिंग सिस्टम काफी नहीं है, और हर हफ्ते मिलने वाला हिस्सा आने-जाने के लिए भी काफी नहीं है। इसके अलावा, मरीजों की देखभाल के लिए तय कीमती समय, फ्यूल की लाइनों में बर्बाद हो रहा है।
हेल्थ वर्कर्स ने अधिकारियों की इस बात के लिए भी आलोचना की कि लगभग एक हफ्ते पहले इन मामलों के बारे में बताए जाने के बावजूद वे कोई सही एक्शन नहीं ले पाए। उन्होंने बताया कि हेल्थ सर्विसेज जरूरी हैं और उन्हें लगातार सपोर्ट की जरूरत है।
फ्यूल और ट्रांसपोर्ट की कमी ने हॉस्पिटल के काम पर असर डालना शुरू कर दिया है, जिससे कुछ डॉक्टर, स्पेशलिस्ट और स्टाफ ड्यूटी पर नहीं आ पा रहे हैं।
गवर्नमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (जीएमओए) की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने कहा है कि वह हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं और हेल्थ सर्विसेज जारी रखने के बारे में आगे के फैसलों की घोषणा करेगी।
डेली एफटी के अनुसार, 15 मार्च को भी जीएमओए ने एक बैठक कर सरकार इस मसले को तुरंत सुलझाने की अपील की थी। इसे लेकर एक बयान भी जारी किया गया था। एसोसिएशन ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से भी दखल देने का आग्रह किया था।
दरअसल, मिडिल ईस्ट संकट को ध्यान में रख श्रीलंका सरकार ने कुछ कदम उठाए, जिसमें बुधवार का सार्वजनिक अवकाश, पेट्रोल-डीजल की राशनिंग, और क्यूआर-आधारित ईंधन आपूर्ति जैसे प्रावधान किए गए थे। चिकित्सक समुदाय तेल को लेकर लिए फैसले का विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि कई स्वास्थ्यकर्मी बहुत दूर से आते हैं, और उनके लिए ईंधन की राशनिंग दिक्कत पैदा कर सकती है।

