ईरान में 32 लाख लोग घर छोड़ने पर हुए मजबूर: यूएनएचसीआर

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नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण अब तक करीब 32 लाख लोग ईरान के भीतर ही विस्थापित हो चुके हैं।

एजेंसी ने कहा कि यह आंकड़ा देशभर में विस्थापित परिवारों के शुरुआती आकलन के आधार पर तैयार किया गया है। यूएनएचसीआर के मुताबिक अगर संघर्ष जारी रहा तो विस्थापितों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे मानवीय संकट और गहरा जाएगा।

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद 28 फरवरी से ईरान में युद्ध जारी है, जिसके कारण लाखों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर जाने को मजबूर हुए हैं।

एजेंसी के अनुसार, देश के रिफ्यूजी परिवारों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ा है, जिनमें ज्यादातर अफगान हैं। उनकी पहले से ही हालत काफी दयनीय है। बढ़ती असुरक्षा और जरूरी सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण परिवार प्रभावित इलाकों को छोड़ रहे हैं। एजेंसी ने अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत बॉर्डर क्रॉस कर दूसरी जगह जाने को तत्पर लोगों के लिए स्थिति अनुकूल करने की वकालत की है। कहा है कि ऐसे लोग जो सुरक्षित रहना चाहते हैं उनके लिए बॉर्डर खोल दिए जाने चाहिए।

वहीं, इस सैन्य संघर्ष में कई लोगों की जान भी जा रही है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान सरकार की प्रवक्ता फतेमेह मोहजेरानी ने एक वीडियो इंटरव्यू में आंकड़ों की जुबानी बदहाली की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि हमलों में कुल 216 महिलाएं, 18 साल से कम उम्र के 198 किशोर और पांच साल से कम उम्र के 11 बच्चे मारे गए। सबसे कम उम्र का शिकार आठ महीने का बच्चा था, जबकि सबसे कम उम्र का घायल व्यक्ति चार महीने का शिशु है।

मोहजेरानी ने मेडिकल केंद्रों को हुए नुकसान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 21 इमरजेंसी यूनिट को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से तीन पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। मरने वाले हेल्थकेयर वर्कर्स की संख्या भी 12 हो गई है।