ईरान में “ब्लैक रेन” से सेहत को भारी नुकसान, तेल संयंत्र पर हमले के बाद डब्ल्यूएचओ की चेतावनी

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नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि हाल ही में ईरान के तेल प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों के बाद कुछ इलाकों में “ब्लैक रेन” (काली बारिश) और हवा में फैले जहरीले रसायनों के कारण लोगों को सांस संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। संगठन ने ईरानी अधिकारियों द्वारा जारी उस एडवाइजरी का समर्थन किया है, जिसमें लोगों से एहतियात के तौर पर घरों के अंदर रहने की अपील की गई है।

संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी का ईरान में भी एक कार्यालय है और वह स्वास्थ्य आपात स्थितियों में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करती है। एजेंसी के मुताबिक इस सप्ताह उसे कई ऐसी रिपोर्ट मिली हैं जिनमें बारिश के साथ तेल जैसे काले पदार्थ गिरने की बात कही गई है।

दरअसल, अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान के दौरान ईरान की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े ठिकानों पर हमले तेज हो गए हैं। एक तेल रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद राजधानी तेहरान में काले धुएं का घना गुबार फैल गया था। जिनेवा में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने कहा कि “ब्लैक रेन और उससे जुड़ी एसिडिक बारिश वास्तव में लोगों के लिए खतरा बन सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें सांस की समस्या है।”

उन्होंने बताया कि ईरान ने नागरिकों को एहतियात के तौर पर घर के अंदर रहने की सलाह दी है, और मौजूदा हालात को देखते हुए यह कदम उचित माना जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार तेल भंडारण स्थलों और रिफाइनरियों में लगी आग के कारण बड़ी मात्रा में जहरीले हाइड्रोकार्बन, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन यौगिक वातावरण में फैल गए हैं।

इन रसायनों के धुएं या सूक्ष्म कणों को सांस के जरिए अंदर लेने या त्वचा के संपर्क में आने से सिरदर्द, आंखों और त्वचा में जलन तथा सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कुछ रासायनिक यौगिकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

लोगों को सलाह दी गई है कि घरों के अंदर रहें, बाहर निकलते समय मास्क पहनें और शरीर को ढककर खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

हालांकि क्षेत्र में वायु गुणवत्ता से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन मौसम के अनुमान बताते हैं कि सप्ताह के बाकी दिनों में सूखे हालात रहने की संभावना है, जिससे धीरे-धीरे हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।