नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। राज्यसभा ने गुरुवार को जन विश्वास (उपबंधो का संशोधन) विधेयक 2026 पारित किया। इस संशोधन विधेयक के जरिए सैकड़ों पुराने कानूनों में सुधार किया गया है। इनमें से कई कानून तो ऐसे हैं जो ब्रिटिश राज के समय से चले आ रहे थे। यही नहीं, ये कानून आज के समय में अप्रासंगिक भी हो चुके हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक, इन सुधारों से जटिल प्रक्रियाएं सरल होंगी, कागजी काम कम होगा, छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी व लोगों के जीवन में आसानी आएगी।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस विधेयक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार यह मानती है कि अत्यधिक दंड से अनुशासन नहीं आता, बल्कि समझाने और विश्वास दिलाने से आता है। छोटी गलती हो तो हल्का दंड देकर सुधार का मौका देना ज्यादा बेहतर है, बजाय इसके कि हर बात के लिए कोर्ट का सहारा लिया जाए।
उन्होंने कहा, हम यह नहीं चाहते कि देश के कानून सिर्फ दंड के डर से चलें। हम चाहते हैं कि यह देश विश्वास के आधार पर आगे बढ़े और उसी विश्वास से विकसित भारत 2047 का रास्ता तैयार हो। चाणक्य ने न्यायशास्त्र में ‘यथार्थ दंड’ की बात कही है, जिसका मतलब है संतुलित दंड। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जो व्यक्ति उचित और न्यायसंगत दंड देता है, वही सम्मान पाता है। जब दंड सोच-समझकर दिया जाता है, तो समाज में धर्म और अनुशासन अपने आप स्थापित होता है।
उन्होंने कहा कि अगर हम लोगों को सिर्फ डराकर कानून का पालन करवाना चाहेंगे, तो वे डर के कारण नियम मानेंगे, लेकिन इससे एक स्वस्थ समाज नहीं बनता। असली बदलाव तब आता है जब लोगों को यह भरोसा हो कि देश की न्याय व्यवस्था उनके साथ न्याय करेगी। अगर किसी से छोटी-मोटी गलती हो जाए, बिना किसी गलत मंशा के, तो उसे भारी सजा या बदनामी का डर नहीं होना चाहिए। बल्कि उसे यह विश्वास होना चाहिए कि सरकार और व्यवस्था उस पर भरोसा करती है। यही सोच ‘जनविश्वास’ विधेयक के पीछे है। पीयूष गोयल ने कहा, पहले भी हम जनविश्वास से जुड़ा बिल लेकर आए थे, जिसमें यह मानकर चला गया कि देश की जनता जिम्मेदार है और खुद सही निर्णय ले सकती है।
उन्होंने कहा, पहले छोटी-छोटी गलतियों के लिए लोगों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार गलती इतनी छोटी होती थी कि जुर्माना सिर्फ 100 या 200 रुपए, लेकिन प्रक्रिया में हजारों रुपए और बहुत समय बर्बाद हो जाता था। अब इस नए बदलाव में हजार से ज्यादा पुराने कानूनों में सुधार किया गया है। खासकर वे कानून जो अंग्रेजों के समय से चले आ रहे थे और आज के समय में अप्रासंगिक हो चुके थे।
उन्होंने कहा कि अगर हम इतिहास की ओर देखें, तो ‘रामराज्य’ की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि वहां शासन का आधार दंड नहीं, बल्कि न्याय और विश्वास था। हर व्यक्ति को सुना जाता था, हर नागरिक को सम्मान मिलता था, और लोग बिना भय के जीवन जीते थे। जनविश्वास बिल उसी दिशा में एक और कदम है। यह एक ऐसा प्रयास है जिसमें सरकार जनता पर भरोसा कर रही है, उन्हें परेशान करने के बजाय सुविधा देने की कोशिश कर रही है।
गोयल ने कहा कि मैं समझता हूं कि यह पहल 21वीं सदी के भारत को एक नए प्रकार के ‘रामराज्य’ की ओर ले जाने का प्रयास है जहां शासन सेवा करे, भरोसा करे और जनता के जीवन को आसान बनाए। यदि कोई छोटी गलती हो जाए जिसमें कोई गलत मंशा न हो तो उस पर भारी दंड के बजाय एक सामान्य पेनल्टी लगाकर मामले को वहीं समाप्त किया जा सके। यही प्रावधान इस विधेयक में किए गए हैं।
पहले कई ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने का अधिकार केवल न्यायालय के पास था। इससे हर छोटे मामले के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ता था, जिससे न्याय व्यवस्था पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब इन प्रक्रियाओं को सरल बनाकर लोगों को राहत देने का प्रयास किया गया है। अगर हम अपने इतिहास की ओर देखें, तो रामराज्य की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि वहां शासन का आधार दंड नहीं, बल्कि न्याय और विश्वास था। वहाँ हर नागरिक की बात सुनी जाती थी, हर व्यक्ति को सम्मान मिलता था, और लोग बिना भय के जीवन जीते थे।


