रांची, 11 फरवरी (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा ने पूरी कार्यवाही को डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में मंगलवार को अहम शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) परियोजना के सेवा केंद्र का उद्घाटन किया। इस दौरान विधायकों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित हुआ और उनके बीच टैबलेट का वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन के माध्यम से विधायी कार्यों को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाया जाएगा। इस एप्लीकेशन के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर विधायक अपने प्रश्न, ध्यानाकर्षण, प्रस्ताव और अन्य दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। इससे उन्हें सत्र के दौरान बार-बार कागजी प्रक्रिया के लिए विधानसभा आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि विधानसभा कर्मियों को भी कामकाज में सहूलियत मिलेगी। यह व्यवस्था 18 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आंशिक रूप से लागू कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बाद झारखंड प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेशन से बेहतर कम्युनिकेशन और समन्वय स्थापित होगा। पहले कई बार समन्वय के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन डिजिटल व्यवस्था से इन समस्याओं में कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने साइबर सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग के लिए सभी को सतर्क रहना होगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने कहा कि देश की लगभग 20 राज्यों की विधानसभाओं में नेवा के माध्यम से डिजिटल कार्यप्रणाली लागू की जा चुकी है। झारखंड भी अब इस पहल से जुड़ रहा है। इस अवसर पर सरकार के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विधानसभा कर्मी उपस्थित थे।
नेवा सेवा केंद्र की शुरुआत को झारखंड विधानसभा में आधुनिक और पारदर्शी विधायी व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

