झारखंड विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश, प्रति व्यक्ति आय पहली बार एक लाख के पार

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रांची, 21 फरवरी (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के चौथे दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने शनिवार को वर्ष 2025-26 के लिए बजट पूर्व आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में प्रति व्यक्ति आय पहली बार एक लाख रुपये के पार पहुंच गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है और गरीबी दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2016-17 में वर्तमान मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय करीब 60 हजार रुपए थी, जो 2024-25 में बढ़कर 1,16,663 रुपए हो गई। 2025-26 में इसके 1,25,677 रुपए और 2026-27 में 1,35,195 रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। वास्तविक प्रति व्यक्ति आय 68,357 रुपए तक पहुंची है, जो 2011-12 की तुलना में 65.7 प्रतिशत अधिक है। इससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति में ठोस सुधार का संकेत मिलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2011-12 में स्थिर कीमतों पर राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 1,50,918 करोड़ रुपए था, जो 2024-25 में बढ़कर 3,03,178 करोड़ रुपए हो गया। इस तरह राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग दोगुनी हो चुकी है। वर्तमान कीमतों पर जीएसडीपी 5,16,255 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो इसी अवधि में तीन गुना से अधिक वृद्धि को दर्शाता है।

वर्ष 2024-25 में राज्य की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 7.02 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से अधिक है। यह लगातार चौथा वर्ष है जब विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर रही है। 2020-21 में कोरोना महामारी के दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था में 5.30 प्रतिशत की कमी आई थी, जो राष्ट्रीय गिरावट 5.8 प्रतिशत से कम थी। 2020-21 से 2024-25 के दौरान राज्य की वास्तविक चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) 8.4 प्रतिशत रही, जो मजबूत रिकवरी का संकेत है।

रिपोर्ट के मुताबिक आगामी वर्षों के अनुमान भी सकारात्मक हैं। स्थिर कीमतों पर जीएसडीपी 2025-26 में 3,21,892 करोड़ रुपए और 2026-27 में 3,41,064 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, वर्तमान कीमतों पर 2025-26 में यह 5,61,010 करोड़ रुपए और 2026-27 में 6,08,182 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज की गई है।

वर्ष 2023-24 में जहां मुद्रास्फीति छह प्रतिशत थी, वहीं 2024-25 में यह घटकर लगभग चार प्रतिशत पर आ गई। कोर मुद्रास्फीति 2.5 से 3 प्रतिशत के दायरे में रही। ग्रामीण और शहरी महंगाई के बीच का अंतर भी लगभग समाप्त हो गया है। आर्थिक संरचना में बदलाव भी सामने आया है। सेवा क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा क्षेत्र बन गया है।

2011-12 में सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 38.5 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 45.56 प्रतिशत हो गई। वहीं, उद्योग क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन कृषि की हिस्सेदारी 9.65 प्रतिशत से घटकर करीब छह प्रतिशत रह गई है, हालांकि उत्पादन में वृद्धि जारी है।

रिपोर्ट में गरीबी दर में कमी को बड़ी उपलब्धि बताया गया है। वर्ष 2015-16 में राज्य में गरीबी दर 42.10 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में घटकर 28.81 प्रतिशत रह गई। पांच वर्षों में 13.29 प्रतिशत की कमी राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई गई है।

सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य गठन के बाद से बजट आकार में करीब 20 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2001-02 में बजट 6,067 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। राज्य के अपने राजस्व स्रोतों की औसत वृद्धि दर 14.2 प्रतिशत रही है।