बीजिंग, 6 मार्च (आईएएनएस)। चीन की राजधानी पेइचिंग में हर साल मार्च में आयोजित एनपीसी (चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा) और सीपीपीसीसी (चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन) के वार्षिक सम्मेलनों को दो सत्र कहा जाता है। यह न सिर्फ़ चीन में अहम राजनीतिक घटना है, बल्कि विदेशी लोगों के लिए चीनी शैली के लोकतंत्र को समझने की खिड़की भी है। विदेशी दोस्तों के लिए चीन में लोकतंत्र कुछ हद तक अमूर्त हो सकता है। वास्तव में दो सत्र केवल गंभीर सम्मेलन स्थल और गरमागरम चर्चा ही नहीं, यह एक उत्कृष्ट तंत्र है, जिससे जनमत को राष्ट्रीय नीति में बदला जा सकता है।
चीनी शैली का लोकतंत्र कोई रस्मी लोकतंत्र नहीं है, जहां लोग मतदान के दौरान जागते हैं और उसके बाद सो जाते हैं। चीनी शैली का लोकतंत्र पूरी श्रृंखला, पूरी प्रक्रिया और सभी पहलुओं में जन लोकतंत्र है। एनपीसी के प्रतिनिधि और सीपीपीसीसी के सदस्य जीवन के सभी क्षेत्रों से आते हैं। वे खुद ही जनता की राय के “सेंसर” हैं। उनके जरिए जनमत को खेतों से जन वृहद भवन तक पहुंचाया जाता है।
उदाहरण के लिए एनपीसी के प्रतिनिधि, आनह्वेई प्रांत के किसान श्यू चोंगश्यांग अपना जीवन खेतों को समर्पित करते हैं। उन्होंने पाया कि जीवन स्तर के उन्नत होने के चलते ऑर्गेनिक अनाज और तेल की मांग तेज़ी से बढ़ी, लेकिन बाज़ार में जाने-माने ब्रांड की कमी है। इसलिए पिछले साल के दो सत्र के दौरान उन्होंने ऑर्गेनिक उत्पाद के क्षेत्र में सार्वजनिक ब्रांड बनाने का सुझाव प्रस्तुत किया। यह सुझाव श्यू चोंगश्यांग के आस-पास लाखों किसानों की उम्मीदों से भरा है। उन्हें आशा है कि “स्वच्छ जल और हरे-भरे पहाड़” सचमुच “अमूल्य संपत्ति” में बदल सकेंगे।
इससे भी ज्यादा प्रभावशाली है कि लोकतंत्र के बीज हाई स्कूल में भी बोए जा चुके हैं। शैनशी प्रांत के शीआन के ओशिन नंबर वन हाई स्कूल में “मॉडल सीपीपीसीसी” क्लब के छात्रों ने कई महीनों के शोध के बाद दो “मसौदा प्रस्ताव” पूरे किए। एक डिजिटल पठन की साक्षरता में सुधार पर ध्यान देता है, जबकि दूसरा बोलियों के विरासत और संरक्षण पर फोकस करता है। उक्त दो सुझाव सीपीपीसीसी के सदस्यों के जरिए आयोजित हो रहे दो सत्र में पहुंचाए गए। इससे युवाओं की आवाज लोकतांत्रिक माध्यम से सुनाई जा सकेगी। यह लगातार 11वां साल है जब शीआन के ओशिन नंबर वन हाई स्कूल के छात्रों के “मसौदा प्रस्ताव” को दो सत्र में लाया गया है।
इन कहानियों से चीनी शैली के लोकतंत्र का अंदरूनी स्वभाव दिखता है। यानीकि सुझाव और प्रस्ताव बंद कमरे में हुई बातचीत का नतीजा नहीं होता, बल्कि एनपीसी के प्रतिनिधियों और सीपीपीसीसी के सदस्यों द्वारा लोगों की आवाज़ सुनने का परिणाम है। आंकड़ों के अनुसार 14वीं एनपीसी के तीसरे पूर्णाधिवेशन के दौरान प्रतिनिधियों ने कुल 9,160 सुझाव पेश किए। हर मुद्दे के पीछे नागरिकों की रोजी-रोटी से जुड़ी खास मांग होती है।
सुझाव देना तो बस पहला कदम है। चीनी शैली के लोकतंत्र की ताकत इस बात में है कि इन “कागज़ पर लिखी आवाज़” को ठोस नीति में कैसे बदला जाता है। बताया जाता है कि पिछले दो सत्र में प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत सभी 9,160 सुझावों को सुलझाने की ज़िम्मेदारी 211 विभागों ने ली। अब सभी का निपटारा हो चुका है और प्रतिनिधियों को जबाव दिया गया है।
जैसा कि पिछले साल के दो सत्र के दौरान क्वांगतोंग, शांगहाई और स्छ्वान से आए कई प्रतिनिधियों ने विनिर्माण उद्योग के विकास में एआई की भूमिका बढ़ाने पर सुझाव पेश किए। उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन सुझावों को अपनाकर “एआई प्लस विनिर्माण” की विशेष कार्रवाई की कार्यान्वयन संबंधी राय जारी की। इसमें 74 नीतिगत कदम और 177 ठोस राय शामिल हैं। प्रतिनिधियों का विचार विनिर्माण उद्योग का उच्च गुणवत्ता वाला विकास बढ़ाने की राष्ट्रीय नीति में बदला गया।
वहीं, आम लोगों के लिए लोकतंत्र सिर्फ़ प्रक्रिया के बारे में नहीं है, बल्कि नतीजों के बारे में भी है। चीनी शैली के लोकतंत्र का असर आखिर में लोगों की परेशानी को हल करने में दिखना चाहिए।
इसके लिए कृषि और ग्रामीण मामला मंत्रालय ने प्रतिनिधियों के सुझाव को अपनाकर कृषि मेला और उपभोग का प्रोत्साहन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया। इससे कृषि उत्पादों की बिक्री 30 अरब युआन से ज़्यादा हो गई। तमाम प्रतिनिधियों ने हनान प्रांत के ह्वाईह नदी में सुधार करने का सुझाव प्रस्तुत किया। इससे 10 अरब युआन से अधिक निवेश वाली परियोजना का निर्माण नवंबर 2025 में शुरू हुआ।
इस साल के दो सत्र की ओर देखें। 15वीं पंचवर्षीय योजना की मसौदा रूपरेखा की समीक्षा मुख्य एजेंडा है। अगले पांच सालों में चीन में विकास की योजना प्रतिनिधियों और सदस्यों की चर्चा और सुझाव से धीरे-धीरे साफ़ होती जा रही है। दो सत्र में दिखाया गया है कि लोकतंत्र एक चलने वाली और गहरी होती प्रक्रिया है, जो जनता से आती है और जनता के पास वापस जाती है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

