लखनऊ, 19 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि कौशल विकास विभाग के माध्यम से सीधी सरकारी नौकरी देने का कोई प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में नियुक्ति केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से ही की जाती है और यही व्यवस्था सभी शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होती है।
सदन में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंत्री अग्रवाल ने कहा कि विभाग का मूल उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य बनाना है, न कि उन्हें सीधे सरकारी सेवा में समायोजित करना। उन्होंने बताया कि कौशल विकास योजनाओं के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योगों की वास्तविक मांग और बाजार की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं। इसके लिए विभिन्न औद्योगिक संगठनों, सेक्टर स्किल काउंसिल्स और इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ नियमित संवाद और समन्वय स्थापित किया गया है।
मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण साझेदारों को स्पष्ट लक्ष्य दिया गया है कि कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। विभाग इस लक्ष्य की नियमित समीक्षा भी करता है ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्लेसमेंट की प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र में अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए कंपनियों के साथ कैंपस इंटरव्यू और प्लेसमेंट ड्राइव भी आयोजित किए जा रहे हैं। युवाओं को रोजगार से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक नोडल आईटीआई में मासिक रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है, जबकि प्रत्येक तीन माह पर मंडल स्तरीय रोजगार मेले आयोजित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश स्तर पर पांच बड़े रोजगार मेलों के आयोजन की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिनमें देश की प्रतिष्ठित कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा।
मंत्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और हुनरमंद युवा तैयार करना है। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को तकनीकी दक्षता, व्यवहारिक ज्ञान और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

