नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। इस वर्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 1 लाख, 39 हजार, 289 करोड़ रुपए कर दिया गया है। यह बजट आवंटन बीते वर्ष के मुकाबले 10 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक है। पिछले साल केंद्रीय वित्त मंत्रालय को बजट में 1 लाख, 28 हजार, 650 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे।
पद्मश्री से सम्मानित देश के विख्यात शिक्षाविद् ममिडाला जगदीश कुमार का मानना है कि रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट में एक बात बिल्कुल साफ नजर आती है कि भारत अपने लोगों, ज्ञान और कौशल में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। इसका मकसद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों, समान पहुंच, निष्पक्षता, गुणवत्ता और उत्कृष्टता को जमीन पर उतारना है।
यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर ममिडाला जगदीश कुमार ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय का बजट बढ़ाना इस बात का संकेत है कि सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। यह स्कूली शिक्षा योजनाओं को मजबूत समर्थन देने का प्रयास है। दरअसल, स्कूल शिक्षा से जुड़ी प्रमुख योजनाओं को इस बजट में मजबूत सहारा मिला है। समग्र शिक्षा अभियान के लिए 42,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिससे शिक्षकों, स्कूलों और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
वहीं, पीएम पोषण योजना को 12,750 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस आवंटन राशि से बच्चों को पौष्टिक भोजन के जरिए स्वस्थ रखा जा सकेगा। वहीं, पीएम श्री स्कूल योजना के तहत 7,500 करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसका मकसद मॉडल स्कूल तैयार करना और उनके आसपास के स्कूलों की गुणवत्ता भी सुधारना है।
वहीं, बजट में उच्च शिक्षा पर भी खास ध्यान दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के लिए इस बार 78,496 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह राशि केंद्रीय विश्वविद्यालयों, केंद्रीय संस्थानों, छात्रवृत्तियों और शोध प्रयोगशालाओं पर खर्च होगी, ताकि भारतीय संस्थान वैश्विक स्तर पर और प्रतिस्पर्धी बन सकें।
प्रोफेसर जगदीश कुमार ने बताया कि राज्यों के विश्वविद्यालयों को भी इस बजट से फायदा मिलेगा। पीएम-उषा योजना के लिए 1,850 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिससे राज्य विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ सकेगी और वे शोध के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे। प्रोफेसर कुमार बताते हैं कि ज्ञान और तकनीक तक आसान पहुंच बनाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन योजना के लिए 2,200 करोड़ रुपए रखे गए हैं, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को दुनिया की प्रमुख जर्नल्स तक आसान पहुंच मिल सकेगी। इंडिया एआई मिशन को 1,000 करोड़ रुपए दिए गए हैं, ताकि एआई टैलेंट को बढ़ावा मिले और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल जनहित में किया जा सके।
बतौर शिक्षाविद् उनका मानना है कि इस साल का बजट निरंतरता पर भी जोर देता है। इसमें भारतीय भाषा पुस्तक पहल, आईआईटी की क्षमता का विस्तार, और शिक्षा के लिए एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। पूर्व यूजीसी के पूर्व कुलपति के अनुसार, ये सभी कदम मिलकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह बजट शिक्षा को देश के भविष्य की नींव मानते हुए लोगों, ज्ञान और कौशल में भरोसे के साथ निवेश करने का मजबूत संदेश देता है।

