कोडरमा, 6 मार्च (आईएएनएस)। देशभर में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चल रही प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत जन औषधि सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी क्रम में झारखंड के कोडरमा जिले में सदर अस्पताल से एक जागरूकता पदयात्रा निकाली गई।
इस पदयात्रा के माध्यम से लोगों को भारतीय जन औषधि केंद्रों से मिलने वाली सस्ती जेनेरिक दवाइयों के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विधायक डॉ. नीरा यादव, उपायुक्त ऋतुराज और सिविल सर्जन ने हरी झंडी दिखाकर की।
अधिकारियों ने कहा कि जेनेरिक दवाओं की यह व्यवस्था गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इससे दवाइयों पर होने वाला भारी खर्च काफी कम हो रहा है।
विधायक डॉ. नीरा यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि जैसा नाम है वैसा ही इसका काम भी है। उनके मुताबिक जन औषधि केंद्र लोगों के पैसों की बचत कर रहे हैं और यह पहल आम लोगों को बड़ी राहत दे रही है।
उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि इस योजना से उन परिवारों को बड़ी मदद मिली है जो पहले दवाइयों पर अपनी आय का बड़ा हिस्सा खर्च करने को मजबूर होते थे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण काम किया है। आमतौर पर लोग डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं पर ही भरोसा करते हैं, इसलिए यदि इस योजना का अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए तो अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकेंगे।
उपायुक्त ऋतुराज ने बताया कि करीब दो वर्ष पहले कोडरमा में जन औषधि केंद्र की शुरुआत की गई थी और तब से बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ ले रहे हैं। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने नजदीकी जन औषधि केंद्र से दवाइयां खरीदें।
उन्होंने यह भी बताया कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि मुख्य बाजारों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के आसपास भी जन औषधि केंद्र स्थापित किए जाएं। साथ ही पंचायत स्तर पर भी ऐसे केंद्र खोलने की योजना तैयार की जा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक सस्ती दवाओं की सुविधा पहुंच सके।
कोडरमा जिले में सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली निशुल्क दवाओं के अलावा चिकित्सक मरीजों को जेनेरिक दवाएं लेने की भी सलाह दे रहे हैं, जिससे गरीब मरीजों को काफी राहत मिल रही है। जन औषधि केंद्रों के माध्यम से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं भी बाजार मूल्य की तुलना में काफी सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के इलाज का आर्थिक बोझ कम हो रहा है।
इस योजना से लाभान्वित लोगों ने बताया कि जन औषधि केंद्र कई मायनों में उनके लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। पहले जहां उन्हें महंगी ब्रांडेड दवाइयों के लिए अधिक पैसा खर्च करना पड़ता था, वहीं अब वही दवाएं जेनेरिक रूप में काफी कम कीमत पर मिल रही हैं।
कई लाभार्थियों ने बताया कि वे वर्षों से जन औषधि केंद्र से दवाइयां खरीद रहे हैं और यहां मिलने वाली दवाएं गुणवत्ता के मामले में भी भरोसेमंद हैं। कुछ लोगों के अनुसार यहां दवाइयां बाजार की कीमतों की तुलना में 85 प्रतिशत तक सस्ती मिल जाती हैं।
जन औषधि केंद्र के नोडल अधिकारी सुमित पांडे ने बताया कि राज्य में अब लगभग 200 जन औषधि केंद्र सक्रिय हैं, जहां कैंसर, एंटीबायोटिक और अन्य विशेष श्रेणी की कई महत्वपूर्ण दवाइयां उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर जैसी आम बीमारियों की दवाइयां भी यहां सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।
जन औषधि परियोजना को शुरू हुए करीब आठ वर्ष हो चुके हैं। इन वर्षों में इस योजना ने न केवल गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को आर्थिक राहत प्रदान की है, बल्कि लाखों परिवारों के लिए सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर उनके जीवन में राहत और भरोसा भी बढ़ाया है।

