मुंबई, 6 मार्च (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को विधानसभा में बजट पेश किया। सीएम ने 7 लाख 69 हजार से अधिक करोड़ का बजट पेश किया। उन्होंने दावा किया कि इस बजट में कृषि, उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार पैदा करने और महिलाओं पर फोकस किया गया है। पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए कई स्कीम शुरू की गई हैं। हमने किसानों का 2 लाख रुपए तक का लोन माफ करने का ऐलान किया है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस के दावे पर समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता अबू आजमी ने कहा कि जो भी सरकारें आती हैं, वे बहुत बातें करती हैं। बजट हमेशा अच्छा और आकर्षक लगता है, लेकिन किसानों की आत्महत्याएं रुक नहीं रही हैं, वे बढ़ती जा रही हैं। इस बजट में अल्पसंख्यकों के बारे में एक भी शब्द नहीं कहा गया है।
सपा नेता अबू आजमी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बजट पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि आज पेश हुए महायुति सरकार के बजट में अल्पसंख्यकों का कहीं जिक्र तक नहीं है। न शिक्षा के लिए कोई विशेष योजना है, न रोजगार के लिए कोई ठोस कदम और न ही उनके कल्याण के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान है। कई वर्षों से अलग-अलग समितियां और आयोग अल्पसंख्यकों को आरक्षण और विशेष सहायता देने की सिफारिश करते रहे हैं, लेकिन आज तक उन सिफारिशों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार को अपने जज्बात बयान करने के लिए उर्दू चाहिए, लेकिन उर्दू भाषा के लिए बजट में लगभग शून्य प्रावधान रखा गया है। उर्दू स्कूलों, तालीमी इदारों और उर्दू के टीचर्स के लिए भी कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। एक तरफ हर धर्मस्थल के लिए फंड दिया जाता है और दरगाहों पर भी आस्था दिखाई जाती है, लेकिन बजट के समय यही सौतेला व्यवहार क्यों? अगर सरकार आरक्षण नहीं दे सकती और बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं कर सकती तो कम से कम महाराष्ट्र के मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को सम्मान और बराबरी का हक तो दे।
अबू आजमी ने कहा कि एक तरफ सरकार छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चलने का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ सीधे-सीधे नाइंसाफी करती दिखाई देती है। छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम का सिर्फ़ इस्तेमाल करना और सत्ता में बने रहने के लिए मुसलमानों के साथ नफरत भरा व्यवहार करना- यह पूरे महाराष्ट्र का अपमान है। अल्पसंख्यकों को नजरअंदाज करके महाराष्ट्र तरक्की नहीं कर सकता। सरकार को चाहिए कि वह सबको साथ लेकर चलने वाली और इंसाफ पर आधारित नीति अपनाए।
जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून पर अबू आजमी ने कहा कि जबरन किया गया कुछ भी मंज़ूर नहीं है। अगर कोई जबरन धर्म परिवर्तन कराता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

