19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आएंगी अयोध्या, 400 श्रमिकों को करेंगी सम्मानित: नृपेंद्र मिश्रा

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अयोध्या, 17 फरवरी (आईएएनएस)। श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को अयोध्या पहुंचे। सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के विकास कार्यों की प्रगति साझा की।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया, “19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अयोध्या आएंगी और लगभग चार घंटे मंदिर परिसर में बिताएंगी। इस दौरान राष्ट्रपति मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले करीब 400 श्रमिकों को सम्मानित करेंगी।”

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया, “हुतात्मा स्मारक और अस्थायी रामलला मंदिर को स्थायी स्मारक के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन निर्माण कार्यों को अप्रैल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।” उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करते हुए उन्हें श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्थल बनाया जाएगा।

राम कथा संग्रहालय की प्रगति पर जानकारी देते हुए मिश्रा ने बताया कि संग्रहालय में 20 गैलरी बनाई जा रही हैं। इनमें अत्याधुनिक 3डी हनुमान गैलरी भी शामिल होगी, जहां श्रद्धालु 12 मिनट तक 3डी तकनीक के माध्यम से राम कथा के प्रसंग देख सकेंगे।

उन्होंने कहा कि संग्रहालय के कंटेंट की स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है और सितंबर के बाद सीमित आधार पर आम श्रद्धालुओं के लिए इसे खोला जा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि 19 मार्च को राष्ट्रपति के दौरे के बाद श्रद्धालुओं को पास सिस्टम के जरिए मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों में प्रवेश दिया जाएगा। निर्माण कार्यों की गति और सुविधाओं के विस्तार को देखते हुए आने वाले महीनों में श्रद्धालुओं के अनुभव को और बेहतर बनाने की योजना है।

मंदिरों का निर्माण कार्य पूरा होने पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ध्वजारोहण उत्सव मनाया था। अब ट्रस्ट मंदिर निर्माण के शिल्पियों व श्रमदान करने वाले कर्मयोगियों को सम्मानित करेगा। ट्रस्ट की तरफ से इन शिल्पियों और कर्मयोगियों की संख्या 400 तय की है। हालांकि यह संख्या बढ़ भी सकती है।

इससे पहले 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह में गए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विशाल राम मंदिर परिसर में स्थित सप्त मंदिर में भी पूजा की थी। ये सात मंदिर महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह और माता शबरी को समर्पित हैं।