लखनऊ, 22 फरवरी (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रविवार को पार्टी की अखिल भारतीय बैठक में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, सर्वसमाज में जनाधार बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, संसद में हालिया टकराव और देश में उभरती जनसमस्याओं के मद्देनजर बहुजन समाज के हितों की रक्षा के लिए बेहतर राजनीतिक एवं माहौल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बसपा मजबूत होगी, विरोधियों के षड्यंत्र भी बढ़ेंगे जिसका डटकर मुकाबला करना होगा।
मायावती ने 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई पिछली बैठक के दिशा-निर्देशों की राज्यवार प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बीएसपी मजबूत होगी, विरोधियों के षड्यंत्र भी बढ़ेंगे, लेकिन मिशनरी कार्यकर्ताओं को डटकर मुकाबला करते हुए आगे बढ़ना है और सत्ता की मास्टर चाबी” हासिल करना लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में लोग भीमराव अंबेडकर के बहुजन आत्मसम्मान और स्वाभिमान मिशन को आगे बढ़ाने की अपेक्षा बसपा से रखते हैं। पार्टी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अपने पूर्व कार्यकालों के दौरान ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ और कानून के राज की नीति पर चलते हुए सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए।
मायावती ने आरोप लगाया कि विरोधी दलों और उनकी सरकारों की नीतियां गरीब, किसान और बहुजन विरोधी रही हैं तथा कथनी और करनी में अंतर के कारण उनकी विश्वसनीयता घट रही है। ऐसे में बसपा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह नई राजनीतिक उम्मीद के रूप में उभरे। बहुजन समाज के उत्थान के नाम पर निजी स्वार्थ साधने वाले लोगों से सावधान रहने की अपील की गई।
मायावती ने कहा कि जो लोग पार्टी के कारण आगे बढ़े और बाद में बसपा से अलग हो गए, वे समाज के सच्चे हितैषी नहीं हो सकते। ऐसे तत्वों और उन्हें संरक्षण देने वाली पार्टियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों के सहयोग पर आधारित पार्टी है और चुनावी बॉन्ड या ट्रस्ट के माध्यम से मिलने वाले चंदे की राजनीति से अलग है। पार्टी का कहना है कि संविधान के कल्याणकारी उद्देश्यों को सही रूप में लागू करने के लिए राजनीतिक ईमानदारी आवश्यक है।
वैश्विक व्यापार समझौतों पर चिंता मायावती ने विभिन्न देशों, विशेषकर अमेरिका के साथ संभावित व्यापारिक समझौतों को लेकर देश में उठ रही चिंताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ‘फर्स्ट’ की प्रतिस्पर्धा ने विश्व व्यवस्था को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में केंद्र सरकार के सामने किसानों और बहुजनों के हितों की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी है।
–आईएएनएस
विकेटी/एएस

