मध्य पूर्व संकट से हैंडीक्राफ्ट और आम के कारोबार पर पड़ा असर, निर्यात प्रभावित: विशेषज्ञ

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नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर भारत के निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ समय में हैंडीक्राफ्ट, आम जैसे विभिन्न कारोबार पर इसका असर देखने को मिला है। हालांकि अब स्थिति पहले से सुधर रही है और सरकार इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।

केसीसीआई के अध्यक्ष जावेद तेंगा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि हमारा लगभग 50-60 प्रतिशत व्यापार मध्य पूर्व देशों के साथ होता है और खासतौर पर रमजान के दौरान यहां बिक्री काफी बढ़ जाती है। लेकिन इस बार संघर्ष के चलते पूरा कारोबार ठप हो गया है, जिससे निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है।

जावेद तेंगा ने बताया कि युद्ध के कारण बड़ी मात्रा में निर्यात का सामान भारत में ही फंस गया है। वहीं, जो माल पहले ही भेजा जा चुका था, उसकी पेमेंट भी समय पर नहीं आ रही है। उन्होंने बताया कि एक्सपोर्टर्स की प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट बैंकिंग लिमिट भी लगभग खत्म हो चुकी है, जिससे कारोबार पर दबाव और बढ़ गया है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार से कम से कम छह महीने की राहत (एक्सटेंशन) देने की मांग की गई है।

उन्होंने बताया कि हैंडीक्राफ्ट सेक्टर इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। मध्य पूर्व में मूवमेंट रुकने और बाजार बंद होने से बिक्री पूरी तरह थम गई है। तेंगा के मुताबिक, इस स्थिति में हैंडीक्राफ्ट निर्यात पर लगभग 100 प्रतिशत तक असर पड़ा है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

निर्यातकों की समस्याओं को लेकर सरकार तक फीडबैक पहुंचाया गया है। लव अग्रवाल (डीजीएफटी) की ओर से इस मुद्दे को सकारात्मक तरीके से लिया गया है और निर्यातकों को भरोसा दिलाया गया है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम किया जाएगा।

वहीं के बी एक्सपोर्ट के चेयरमैन प्रकाश जे. खाखर ने आईएएनएस से बताया कि मिडिल ईस्ट संकट का असर आम (मैंगो) के निर्यात पर भी पड़ा है। अब निर्यात मुख्य रूप से हवाई मार्ग से हो रहा है, जिससे लागत काफी बढ़ गई है। एयर फ्रेट पहले जहां लगभग 300 रुपए प्रति किलो था, वह अब बढ़कर 600-650 रुपए तक पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि सभी एयरलाइंस इस समय संचालित नहीं हो रही हैं, जिससे कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। फिलहाल लंदन, सिंगापुर, दुबई, हांगकांग और गोवा जैसे गंतव्यों के लिए ही सीमित निर्यात हो पा रहा है। ज्यादा लागत और सीमित विकल्पों के कारण एक्सपोर्टर्स को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

निर्यातकों ने सरकार से अपील की है कि मौजूदा हालात को देखते हुए अस्थायी तौर पर एयर फ्रेट सब्सिडी दी जाए, ताकि बढ़ती लागत का बोझ कम किया जा सके। उनका कहना है कि ओपन स्काई पॉलिसी के चलते एयरलाइंस मनमाने दाम वसूल रही हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।

आम की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सीजन की शुरुआत में कीमतें 1500-1800 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई थीं, जो अब धीरे-धीरे कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बाजार में आवक बढ़ेगी, कीमतें और स्थिर होंगी, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

कुल मिलाकर, मध्य पूर्व संकट ने भारत के निर्यात, खासकर हैंडीक्राफ्ट और कृषि उत्पादों पर बड़ा असर डाला है। हालांकि, सरकार और निर्यातकों के बीच लगातार संवाद से उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस संकट से उबरने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।