नई दिल्ली, 12 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत के कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव और प्रगति देखने को मिली है।
उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था। उस दौर में अमेरिका से पीएल-480 योजना के तहत लाल गेहूं आयात कर देश की जनता को खिलाया जाता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों के कारण देश के अन्न भंडार भर चुके हैं। खासकर चावल के उत्पादन में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि लगभग 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है।
उन्होंने कहा कि अगर कुल खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो साल 2014 तक देश में लगभग 252 मिलियन टन उत्पादन होता था, लेकिन आज यह बढ़कर करीब 357 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि किसानों की मेहनत, बेहतर नीतियों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल का परिणाम है।
केंद्रीय मंत्री ने बागवानी क्षेत्र में हुई प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फलों और सब्जियों के उत्पादन, क्षेत्रफल और उत्पादकता—तीनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां बागवानी फसलों का उत्पादन लगभग 277 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 369 मिलियन टन हो गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।
उन्होंने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भी सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता दोनों है। हालांकि अभी भी कुछ मात्रा में आयात करना पड़ता है, लेकिन सरकार लगातार उत्पादन बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसी दिशा में तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की किसानों के जितनी चाहें उतनी खरीद करने का फैसला किया गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों को सही जानकारी और तकनीकी सहायता देने के लिए सरकार एक बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके। इस प्लेटफॉर्म के पहले चरण को भी लॉन्च किया जा चुका है, जिसमें किसान अपनी भाषा में फोन कॉल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं, धान, दलहन और तिलहन की रिकॉर्ड खरीद की है। साथ ही किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए उर्वरक सब्सिडी भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले साल उर्वरकों पर लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, जबकि इस वर्ष के बजट में भी करीब 1.70 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कृषि क्षेत्र में ऋण की उपलब्धता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 तक कृषि ऋण का आंकड़ा लगभग 8.45 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर करीब 28.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे किसानों को खेती के लिए जरूरी निवेश करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भी जिक्र किया और बताया कि इस योजना के तहत अब तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि किसानों को क्लेम के रूप में दी जा चुकी है। इससे प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को बड़ी राहत मिलती है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बताया। उन्होंने कहा कि 13 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम की राजधानी गुवाहाटी से लगभग 9 करोड़ 32 लाख किसानों के खातों में 18,640 करोड़ रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजेंगे।
उन्होंने बताया कि यह योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी और तब से अब तक किसानों के खातों में 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। 22वीं किस्त जारी होने के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी बताया कि इस योजना का लाभ बड़ी संख्या में महिला किसानों को भी मिल रहा है। लगभग 2 करोड़ 15 लाख से अधिक महिला किसानों के खातों में भी यह राशि भेजी जा रही है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि इस योजना से किसानों का कृषि में निवेश बढ़ा है, जरूरी कामों के लिए कर्ज पर निर्भरता कम हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
उन्होंने देश के किसान भाई-बहनों को बधाई और शुभकामनाएं दीं और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण और कृषि विकास का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

