मुकुल एक शानदार एथलीट, वह कोहली की तरह विकेटों के बीच दौड़ते हैं: जस्टिन लैंगर

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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के हेड कोच जस्टिन लैंगर ने युवा बल्लेबाज मुकुल चौधरी की तारीफ करते हुए उन्हें एक शानदार एथलीट और तेज दिमाग वाला खिलाड़ी बताया है। उन्होंने मुकुल के गेम सेंस और विकेटों के बीच दौड़ने के बेहतरीन अंदाज की तुलना दिग्गज विराट कोहली से की है।

कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के खिलाफ मुकुल चौधरी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 27 गेंदों में 54 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) को 3 विकेट से जीत दिलाई। मुकुल अपनी इस पारी के बाद सुर्खियों में आ गए हैं। लैंगर ने ‘जियोहॉटस्टार’ से कहा, “मुझे जो बात सबसे ज्यादा पसंद है, वह यह है कि मुकुल एक असली एथलीट हैं और जिस तरह से वह विकेटों के बीच दौड़ते हैं, वह जबरदस्त है। यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसा विराट विकेटों के बीच दौड़ते हैं, लेकिन उनकी एक और खासियत उनका गेम सेंस भी है।”

लैंगर ने आगे कहा, “हमने कुछ प्रैक्टिस मैच खेले हैं और जिस तरह से वह खेल के बारे में बात करते हैं, उसे देखकर लगता है कि जैसे उन्होंने 300 मैच खेले हों। जाहिर तौर पर उनके पास काफी पावर है, वह एक शानदार एथलीट हैं और उनका दिमाग भी बहुत तेज है। मुकुल का दिमाग बहुत जिज्ञासु है और वह खुद को बेहतर बनाना चाहते हैं। वह कुछ समय के लिए टीम से दूर रहे और उन्होंने शॉर्ट बॉल पर काम किया। हम हर दिन उनके साथ ड्रिल करते रहे, और फिर वही चीज प्रैक्टिस और मैच, दोनों में नजर आई।”

लैंगर ने बताया कि कैसे उनकी टीम के एनालिस्ट श्रीनिवास चंद्रशेखरन ने मुकुल चौधरी को टीम में शामिल करवाने में अहम भूमिका निभाई। “हमने कुछ महीने पहले मुकुल को एक ट्रेनिंग कैंप में देखा था। इस देश में बहुत टैलेंट है। इसका पूरा श्रेय हमारे डेटा एनालिस्ट श्रीनिवास को जाता है, जिन्होंने कहा था कि कोच हमें इस लड़के को टीम में लेना ही होगा।”

लैंगर से जब पूछा गया कि जब एलएसजी को आखिरी 24 गेंदों में 54 रनों की जरूरत थी, तब उनके दिमाग में क्या चल रहा था, तो उन्होंने कहा, “मैं शायद यही सोच रहा था कि मैं अपने खिलाड़ियों से क्या कहूंगा। मुझे लगा कि हमने इस विकेट पर शानदार गेंदबाजी की। हमारा प्रदर्शन कमाल का रहा। मैंने असल में ये बातें लिख ली थीं कि मुकाबले में हमारी गेंदबाजी और फील्डिंग शानदार रही।”

लैंगर का मानना ​​है कि टूर्नामेंट की शुरुआत में ही इस तरह की जीत हासिल करना टीम के मनोबल के लिए ‘जादुई टॉनिक’ का काम करता है। “अगर आप करीबी मुकाबले जीतते हैं, तो आपको थोड़ा-सा आत्मविश्वास मिलता है, है ना? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप यह गेंदबाजी से करते हैं या बल्लेबाजी से, ये करीबी जीतें एक जादुई टॉनिक की तरह होती हैं।”