बंगाल में बाबरी मस्जिद का निर्माण कार्य : हुमायूं कबीर ने कहा- लोग अपना धर्म मानने के लिए आजाद

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कोलकाता, 11 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य में ईंटें लेकर पहुंच रहे हैं, जिसकी योजना जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष और विधायक हुमायूं कबीर ने बनाई थी।

कबीर के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि कार्यक्रम बुधवार को दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच शुरू हो रहा है। इसके बाद गुरुवार से ‘बाबरी मस्जिद के लिए रैली’ शुरू होगी। यह रैली नादिया जिले के पलाशी से 100 वाहनों के साथ शुरू होगी। प्रत्येक वाहन में चालक सहित छह लोग होंगे। इस प्रकार इस रैली में कुल 600 लोग भाग लेंगे।

यह रैली उत्तरी दिनाजपुर जिले के पलाशी से इटाहार तक कुल 265 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

रैली आयोजित करने की आवश्यकता बताते हुए कबीर ने कहा कि चूंकि कई स्वार्थी तत्व बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण के बारे में गलत सूचना फैला रहे थे, इसलिए इस रैली का उद्देश्य लोगों को इस निर्माण के बारे में सूचित करना था।

जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया, “निर्माण कार्य तीन साल के भीतर पूरा हो जाएगा। इस ढांचे के निर्माण में लगभग 55 करोड़ रुपए की लागत आएगी। मस्जिद के द्वार की ऊंचाई 14 मीटर होगी। इसकी चौड़ाई 5 मीटर होगी। अकेले द्वार के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ रुपये होगी।”

उन्होंने आगे बताया कि इस मस्जिद की नींव पिछले साल 6 दिसंबर को रखी गई थी। बेलडांगा मस्जिद का निर्माण उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित मूल मस्जिद से प्रेरित है, जिसे 6 दिसंबर 1992 को ध्वस्त कर दिया गया था।

हुमायूं कबीर ने कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, मैं उनसे कहूंगा कि वे हट जाएं। लोग अपने धर्म को मानने और मंदिर, चर्च या जो चाहें बनाने के लिए आज़ाद हैं; मैं इस्लाम के नाम पर किसी का विरोध नहीं करूंगा। यह कुछ थोपने के बारे में नहीं है।”

मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक कबीर को शिलान्यास से कुछ ही दिन पहले तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था।

इसी बीच, कबीर ने अपनी राजनीतिक पार्टी, जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया था और इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा विरोधी और तृणमूल कांग्रेस विरोधी सभी पक्षों के गठबंधन का आह्वान किया था। हालांकि, असदुद्दीन ओवैसी द्वारा स्थापित एआईएमआईएम को छोड़कर, उनकी गठबंधन वार्ता में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है।