नारियल, काजू और कोको किसानों को बड़ी राहत, बजट में सरकार का नया प्लान

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नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में 2026-27 का बजट पेश किया। इस बार के बजट में सरकार ने नारियल, काजू और कोको की खेती करने वाले किसानों को बड़ी राहत दी है। उत्पादन बढ़ाने, आत्मनिर्भरता हासिल करने और इन फसलों को वैश्विक स्तर पर प्रीमियम ब्रांड बनाने के लिए नई योजनाओं का ऐलान किया गया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों का समर्थन करके उच्च मूल्य वाली कृषि पर जोर दिया। पूर्वोत्तर में अगर के वृक्षों और पहाड़ी क्षेत्रों में बादाम, अखरोट और चीड़ के मेवों जैसे फलों को भी समर्थन दिया जाएगा।

निर्मला सीतारमण ने कहा, “भारत विश्व में नारियल का सबसे बड़ा उत्पादक है। लगभग 3 करोड़ लोग, जिनमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं, अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं। नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धात्मकता को और बढ़ाने के लिए, मैं नारियल प्रोत्साहन योजना का प्रस्ताव करती हूं, जिसका उद्देश्य प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में पुराने और अनुत्पादक पेड़ों को नई किस्मों से बदलकर उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना है।”

किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य की दिशा में एक और कदम के रूप में, केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय काजू और कोको के लिए एक समर्पित कार्यक्रम का भी प्रस्ताव किया गया है ताकि भारत कच्चे काजू और कोको के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सके और 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांडों में परिवर्तित कर सके।

केंद्र सरकार भारतीय चंदन पारिस्थितिकी तंत्र की प्रतिष्ठा को बहाल करने के लिए लक्षित खेती और कटाई के बाद प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के साथ साझेदारी करेगी।

पुराने, कम उपज वाले बागों को पुनर्जीवित करने और अखरोट, बादाम और चीड़ के फलों की उच्च घनत्व वाली खेती का विस्तार करने के लिए, बजट में किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को शामिल करके मूल्यवर्धन लाने के लिए एक समर्पित कार्यक्रम का समर्थन करने का प्रस्ताव है।

किसानों की आय बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य के तहत, बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और स्टार्ट-अप और महिला नेतृत्व वाले समूहों के साथ-साथ मछली किसान उत्पादक संगठनों को शामिल करते हुए बाजार संबंधों को सक्षम बनाने के प्रावधान शामिल हैं।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने के प्रमुख क्षेत्रों में से एक होगा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए, सरकार पशुपालन क्षेत्र को उद्यमिता विकास में निम्नलिखित माध्यमों से सहयोग देगी: (क) ऋण-आधारित सब्सिडी कार्यक्रम (ख) पशुधन उद्यमों का विस्तार और आधुनिकीकरण (ग) पशुधन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गी पालन पर केंद्रित एकीकृत मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण बढ़ाना और (घ) पशुधन किसान उत्पादक संगठनों के निर्माण को प्रोत्साहित करना।

उन्होंने ‘भारत-विस्तार’ के शुभारंभ के प्रस्ताव की घोषणा की। यह कृषि संसाधनों तक किसानों की पहुंच को आसान बनाने वाली एक आभासी और एकीकृत व्यवस्था होगी। भारत-विस्तार को एक बहुभाषी एआई आधारित उपकरण के रूप में विकसित किया जाएगा, जो एग्रीस्टैक पोर्टल तथा कृषि पद्धतियों पर आधारित आईसीएआर पैकेज को आधुनिक एआई प्रणालियों से जोड़ेगा। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी और अनुकूलित परामर्श सहायता प्रदान करके जोखिम कम होगा।