नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कमर अली अखून का निधन, जम्मू-कश्मीर में शोक की लहर

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नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में शुक्रवार को उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व नेता कमर अली अखून के निधन का समाचार सामने आया। वे पूर्व खाद्य मंत्री, कारगिल के एक अनुभवी राजनीतिक व्यक्तित्व और लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय थे, जिन्हें कारगिल की जनता की आवाज के रूप में पहचाना जाता था।

सभी दलों के सांसदों ने जन कल्याण में उनके योगदान और दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों की चिंताओं को उठाने के उनके प्रयासों को सराहा। कई सदस्यों ने उन्हें एक समर्पित नेता बताया जो जनता के लिए सुलभ रहे और क्षेत्र में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए काम किया।

कारगिल के संगरा गांव के निवासी कमर अली अखून को एक जमीन से जुड़ा हुआ अनुभवी राजनीतिज्ञ माना जाता था। वे जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े रहे और अपने राजनीतिक जीवन के दौरान खाद्य मंत्री का महत्वपूर्ण दायित्व संभाला।

प्रशासनिक अनुभव और क्षेत्रीय समझ के कारण वे पर्वतीय और दूरदराज इलाकों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सरकार के सामने रखते थे। विशेष रूप से ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में खाद्य आपूर्ति और जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका को सराहा जाता रहा।

कमर अली अखून ने कारगिल और लद्दाख क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को चाहे वह बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा हो या प्रशासनिक पहुंच को लगातार उठाया था।

परिवार के अनुसार अली अखून पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। स्थानीय लोगों ने उन्हें समाज का सच्चा सेवक बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए पहल की।

अली अखून ने अपने जीवनकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कई अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासन से संवाद भी किया। उनके प्रयासों से कई लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला।

विधायक सज्जाद शाहीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के पुराने नेता और कारगिल के पूर्व मंत्री जेबी कमर अली आखून साहिब के निधन से बहुत सदमा और दुख हुआ। अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में, उन्होंने कमिटमेंट और पक्के इरादे के साथ लोगों की सेवा की। उनके निधन से न केवल कारगिल बल्कि पूरे जम्मू और कश्मीर राज्य के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में एक गहरा खालीपन आ गया है। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। अल्लाह उन्हें जन्नत में सबसे ऊंचा स्थान दे और दुखी परिवार को इस नुकसान से उबरने की ताकत दे।”