पटना, 7 मार्च (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले और अब उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह सही कदम है कि निशांत कुमार राजनीति में आ रहे हैं।
सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री के सवाल पर अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि सवाल यह है कि पिता लाना चाहते हैं या नहीं। कई बच्चों के पिता होते हैं जो उन्हें राजनीति में नहीं लाना चाहते, लेकिन जो व्यक्ति आना चाहता है, वह नहीं आता। वर्तमान परिस्थितियों में यह एक ठीक कदम है।
राजद नेता ने बंगाल एसआईआर पर टीएमसी द्वारा विरोध किए जाने पर कहा कि आपको चुनाव के समय ही एसआईआर याद आती है। उससे पहले लोग सोते रहते हैं। पूरे देश में इसे समय रहते लागू करना चाहिए था। यह सिर्फ चुनाव के समय कराया जाता है हमने तो देखा है। हमारी विधानसभा में कई लोगों का नाम काटा गया था। यदि किसी व्यक्ति का नाम पिछले चार-पांच चुनावों से है तो क्या आप उसका नाम वोटर लिस्ट से ‘घुसपैठिए’ कहकर हटा देंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा स्पीकर खुद पुराने ट्रेडिशन को मानते तो वह खुद इस्तीफा दे देते।
अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि हम लोकसभा के सदस्य नहीं हैं, इसलिए वहां की राजनीति पूरी तरह नहीं जानते। अमूमन पार्टी व्हिप ही दिशा तय करती है। इस सरकार में उल्टी गंगा बह रही है। सरकार का काम जनता के लिए कार्य करना है और विपक्ष का काम सरकार की कमियों को उजागर करना है, लेकिन जब कमियों को उजागर करने वाला टारगेट बन जाता है तो यह उचित नहीं है। संसद की गरिमा बरकरार रहनी चाहिए। अविश्वास प्रस्ताव पर जीत भी मान लें, मगर जितने लोगों ने आपके विरोध में वोट किया, उससे स्पष्ट हो जाता है कि जनता क्या सोचती है। स्पीकर पर लोगों की आस्था होती है और स्पीकर उसी प्रकार एक्ट करते हैं।

