पटना, 12 मर्च (आईएएनएस)। बिहार की राजनीति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत को लेकर बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा कि निशांत में राजनीतिक क्षमता है और उनका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है। हालांकि, उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का फैसला नीतीश कुमार और एनडीए के नेताओं को मिलकर लेना होगा।
आरसीपी सिंह ने कहा कि निशांत का राजनीति में आना अच्छी बात है और उन्होंने खुद भी इसका स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि उनका निशांत के साथ वर्षों पुराना संबंध रहा है और जब उन्होंने पार्टी जॉइन की, तब उन्होंने उन्हें आशीर्वाद भी दिया था।
आरसीपी सिंह ने कहा कि निशांत में क्षमता है और अगर कुछ लोग उन्हें उपमुख्यमंत्री बनने के योग्य मानते हैं, तो फिर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में भी कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए के शीर्ष नेताओं को लेना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में आने के बाद किसी भी नेता के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी सभी गुटों को साथ लेकर चलने की होती है। जब कोई नेता किसी दल की जिम्मेदारी संभालता है तो उसे अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों को एक साथ समेटकर रखना पड़ता है। यही एक नेता की सबसे बड़ी परीक्षा होती है।
आरसीपी सिंह ने निशांत के पार्टी में शामिल होने के कार्यक्रम को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 8 मार्च को जब निशांत ने पार्टी जॉइन की, तब अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद मंच पर मौजूद होते तो एक अलग संदेश जाता।
उन्होंने कहा कि अगर उस समय नीतीश कुमार मंच पर रहते और निशांत उनसे आशीर्वाद लेते तो समर्थकों के बीच एक अलग तरह का सकारात्मक संदेश जाता। उन्होंने यह भी कहा कि मंच पर पैर छूना गलत नहीं है, लेकिन राजनीतिक मंच पर इसका एक अलग प्रतीकात्मक महत्व होता है।
आरसीपी सिंह ने यह भी कहा कि राजनीति में गुटबाजी को संभालना नेता की जिम्मेदारी होती है और निशांत को भी यह काम खुद करना होगा। अलग-अलग सोच रखने वाले लोगों को साथ लेकर चलना ही नेतृत्व की असली कसौटी होती है।
इस दौरान आरसीपी सिंह से जब उनसे दोबारा जनता जदयू में शामिल होने की संभावना को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। आरसीपी सिंह ने कहा कि उन्हें यह बात सहज नहीं लगती। करीब तीन महीने पहले ही एनडीए ने बिहार में विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा था, और उन्हें बड़ी सफलता भी मिली थी।
आरसीपी सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने हाल ही में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और वे लगातार सक्रिय भी हैं। वह विकास कार्यों की समीक्षा के लिए यात्रा कर रहे हैं, नई घोषणाएं कर रहे हैं और विधानसभा के बजट सत्र में भी हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा जाने की चर्चाओं को लेकर कुछ परिस्थितियां संदेह पैदा करती हैं।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ परिस्थितियों के आधार पर उठ रहा सवाल है, क्योंकि अंतिम निर्णय तो खुद नीतीश कुमार का ही होगा और उन पर कोई फैसला थोपा नहीं जा सकता।
आरसीपी सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाना होता तो वह 2020 में ही बना सकती थी। उस समय जदयू को केवल 43 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को करीब 74–75 सीटें हासिल हुई थीं।
उन्होंने बताया कि उस समय खुद नीतीश कुमार ने कहा था कि भाजपा चाहे तो अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। लेकिन एनडीए के नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें समझाया कि उन्हें ही मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। इसके बाद ही नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
आरसीपी सिंह ने कहा कि भाजपा भी यह जानती है कि बिहार में चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा गया था और जनता का जनादेश भी काफी हद तक उनके नाम पर मिला था। ऐसे में उन्हें बदलना आसान फैसला नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अब अगर भविष्य में कोई बदलाव होता है तो उस जनादेश को पूरा करने की जिम्मेदारी एनडीए के नेताओं पर होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि निशांत को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए अनुभव हासिल करना जरूरी है।
आरसीपी सिंह के मुताबिक बिहार में करीब 46 मंत्रालय हैं और इतने बड़े प्रशासनिक ढांचे को समझने के लिए अनुभव बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि किताबों से जानकारी मिल सकती है, लेकिन असली सीख तब मिलती है जब जिम्मेदारी मिलती है और काम करने का मौका मिलता है।

