नीतीश कुमार का अनुभव काफी, प्रधानमंत्री पद से कम पर नहीं करना चाहिए समझौता: अवध ओझा (आईएएनएस इंटरव्यू)

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नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी के टिकट पर दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ चुके अवध ओझा ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में देश के ताजा हालातों के अलावा कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। अवध ओझा ने कहा, “राजनीति में अब कुछ भी नहीं बचा है। विचारधारा की तो बात ही छोड़िए, अब कुछ भी शेष नहीं है।” पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल : आपने राजनीति छोड़ दी है, क्या आप खुश हैं?

जवाब : खुशी या संतुष्टि बाहर की उपलब्धियों से नहीं आती। यह इंसान की अंदरूनी स्थिति पर निर्भर करती है। अगर सिर्फ पैसे और सफलता से संतुष्टि मिलती, तो बड़े-बड़े उद्योगपति कभी परेशान नहीं होते। इसलिए असली संतोष मन के भीतर से आता है, न कि बाहरी चीजों से।

सवाल : क्या राजनीति में आदर्शवाद अब भी बचा है या पूरी तरह खत्म हो चुका है?

जवाब : सच कहूं तो राजनीति में अब आदर्शवाद की बात करना भी मुश्किल है। वहां अब बहुत कुछ खत्म हो चुका है। मुझे लगता है कि देश की जनता को यह बात धीरे-धीरे समझ आएगी। हमारी एक आदत है कि जब तक हम खुद मुश्किल में नहीं पड़ते, तब तक चीजों को नजरअंदाज करते रहते हैं। जब जनता सच में परेशान होगी, तभी राजनीति में सुधार की उम्मीद बन सकती है।

सवाल : नीतीश कुमार के बारे में क्या कहेंगे?

जवाब : वह एक बड़े और अनुभवी नेता हैं। उनकी राजनीति में बड़ी उपलब्धियां रही हैं। उन्हें प्रधानमंत्री पद से नीचे समझौता नहीं करना चाहिए। चाहे चार दिन के लिए ही पीएम बनाओ लेकिन बनाओ।

सवाल : अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

जवाब : इस समय पाकिस्तान खुद को मीडिएटर के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह भूमिका भारत को निभानी चाहिए थी। जब भी दुनिया में संकट आता है, भारत को एक मजबूत मध्यस्थ के रूप में सामने आना चाहिए। हमें शांति स्थापित करने में आगे रहना चाहिए।

सवाल : इस दौरान आप प्रधानमंत्री की रणनीति और भूमिका का कैसे आकलन करते हैं?

जवाब : प्रधानमंत्री के पास अच्छे सलाहकार भी हैं, इसलिए उन्हें सही सुझाव जरूर मिलते होंगे। कभी-कभी बड़े नेता भी गलतियां कर जाते हैं, इतिहास में ऐसा हुआ है। मेरा मानना है कि केंद्र सरकार को ट्रंप को खुश करने से ज्यादा भारत के हितों पर ध्यान देना चाहिए। अमेरिका एक व्यापारिक सोच वाला देश है, जहां व्यापार है, वहीं दोस्ती है। इसलिए हमें किसी के सामने झुकने के बजाय मजबूत स्थिति में रहकर बात करनी चाहिए।

सवाल : रेखा गुप्ता सरकार को एक साल पूरा हो गया है, आप क्या कहेंगे?

जवाब : मुझे लगता है कि सरकार खुद अपनी उपलब्धियों को ठीक से पेश नहीं कर पा रही है। मंत्री आज भी पुरानी सरकार की गलतियों को गिनाने में लगी है, लेकिन असली सवाल यह है कि आपने एक साल में क्या नया और अच्छा किया? जनता अब काम देखना चाहती है।

सवाल : अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में बरी किया गया, क्या आप उन्हें भगवान मानते हैं?

जवाब : नहीं, किसी भी नेता को भगवान मानना गलत है। यह चापलूसी होगी, लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा कि वह एक अच्छे और समझदार नेता हैं। उनके पास एक स्पष्ट विजन है और मैंने उनके साथ बैठकर यह महसूस किया है।

सवाल : अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान का चार्टर्ड प्लेन में सफर करना क्या आम आदमी की लाइफस्टाइल है?

जवाब : यह सवाल ही गलत है। क्या नेता बैलगाड़ी में चलें? अगर एक आम आदमी मेहनत करके ऊंचाई तक पहुंच सकता है, तो उसकी लाइफस्टाइल भी बदलेगी। अगर मुझे कहीं जल्दी जाना हो, तो मैं भी समय बचाने के लिए तेज साधन चुनूंगा। इसका मतलब यह नहीं कि वह आम आदमी से दूर हो गया है।

सवाल : राहुल गांधी के बारे में आपकी क्या राय है?

जवाब : वह विदेश क्यों जाते हैं, यह तो वही बेहतर जानते हैं, लेकिन एक नेता के रूप में उन्होंने अच्छा काम किया है। मुझे लगता है कि उन्हें एक अच्छे गुरु या सलाहकार की जरूरत है, जो उन्हें राजनीति को और गहराई से समझने में मदद करे।

सवाल : पश्चिम बंगाल चुनाव में क्या स्थिति दिख रही है?

जवाब : इस बार भाजपा पूरी ताकत से लड़ने के मूड में है और माहौल भी उसके पक्ष में बनता दिख रहा है। जनता बदलाव चाहती है, इसलिए मुकाबला दिलचस्प होगा।

सवाल : उत्तर प्रदेश में क्या अखिलेश यादव की वापसी हो सकती है?

जवाब : बिल्कुल हो सकती है। मैं खुद चाहता हूं कि बदलाव आए। लंबे समय बाद एक नया विकल्प सामने आना चाहिए।

सवाल : अमित शाह द्वारा नक्सलवाद खत्म करने के दावे को आप कैसे देखते हैं?

जवाब : अगर ऐसा होता है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। नक्सलवाद लंबे समय से देश के लिए एक बड़ी समस्या रहा है। इसका अंत होना देश के लिए राहत की बात होगी।

सवाल : क्या अमित शाह सरदार पटेल के पदचिह्नों पर चल रहे हैं?

जवाब : उनके व्यक्तित्व में एक सख्त और मजबूत छवि नजर आती है। जब मैं उन्हें बोलते देखता हूं, तो लगता है कि वे ‘आयरन मैन’ जैसी छवि की ओर बढ़ रहे हैं।

सवाल : क्या नरेंद्र मोदी 2029 में फिर प्रधानमंत्री बन सकते हैं?

जवाब : लोकतंत्र में फैसला जनता करती है, लेकिन यह समझना मुश्किल है कि जनता बार-बार एक ही व्यक्ति को क्यों चुनती है। यह पूरी तरह जनता पर निर्भर है।

सवाल : क्या आपका फिल्मों में जाने का कोई इरादा है?

जवाब : मेरा बॉलीवुड में अच्छा संपर्क है। अगर मौका मिला, तो मैं विलेन का किरदार निभाना चाहूंगा।

सवाल : क्या आम आदमी पार्टी जॉइन करने का आपको कोई पछतावा है?

जवाब : नहीं, मुझे कोई पछतावा नहीं है।

सवाल : ब्रजभूषण शरण सिंह को आप कैसे देखते हैं?

जवाब : हमारे इलाके में लोग उन्हें बाहुबली मानते हैं। मैं उन्हें डॉन नहीं कहूंगा, लेकिन उनकी छवि एक मजबूत नेता की जरूर है।

सवाल : बिहार में फिर से शराब बिक्री शुरू होने पर आपकी क्या राय है?

जवाब : शराब से सरकार को अच्छा राजस्व मिलता है, यह सही है, लेकिन समाज के स्तर पर भी सोचना जरूरी है। अगर लोग जागरूक होंगे और सही दिशा में जाएंगे, तो स्थिति बेहतर होगी लेकिन राज्य को विकास के लिए पैसे की भी जरूरत होती है।

सवाल : एनसीईआरटी विवाद पर आपका क्या कहना है?

जवाब : शिक्षा का मकसद ज्ञान और समझ विकसित करना होना चाहिए, लेकिन अक्सर सरकारें अपनी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा का इस्तेमाल करती हैं, जो सही नहीं है।

सवाल : यूसीसी (समान नागरिक संहिता) पर आपकी क्या राय है?

जवाब : यूसीसी एक अच्छी पहल है। धर्म व्यक्ति का निजी मामला है और इस कानून से किसी के धर्म पर असर नहीं पड़ता। मैं खुद 15 साल मिशनरी स्कूल में पढ़ा हूं, लेकिन अंधेरे में हनुमान चलिसा का पाठ करता हूं।

सवाल : ट्रांसजेंडर बिल पर आपकी राय?

जवाब : ट्रांसजेंडर भी हमारे समाज का हिस्सा हैं। उन्हें वही अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए जो एक आम नागरिक को मिलती हैं।