कराची, 22 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में इमरान खान की सेहत सियासी संग्राम की वजह बनी हुई है। पक्ष-प्रतिपक्ष एक दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं। अब पीपीपी के वरिष्ठ नेता और सिंध प्रांत के मंत्री ने पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर ही अपनी रिहाई के आड़े आने का आरोप लगाया है।
दोनों पार्टियों में रिहाई की ‘डील’ को लेकर चल रही खबरों के बीच पीपीपी के नेता शरजील इनाम मेमन ने रविवार को कहा कि इमरान खान की रिहाई “उनके अपने हाथ में है” क्योंकि यह उनकी पार्टी के “रवैये” पर निर्भर करता है।
प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन के मुताबिक, सिंध के वरिष्ठ मंत्री ने यह बात कराची में मीडिया से बात करते हुए कही।
इमरान की रिहाई के बारे में एक सवाल के जवाब में, मंत्री ने कहा कि जेल में बंद पूर्व पीएम की रिहाई “उनके अपने हाथ में और पीटीआई के रवैये पर निर्भर करती है।”
मेमन ने कहा, “मुझे उनकी रिहाई के बारे में कोई जानकारी नहीं है; हालांकि, यह रमजान का पवित्र महीना है, और मैं उनकी सेहत, खासकर उनकी आंख के लिए दुआ करता हूं।”
इमरान की सेहत हाल के दिनों में ध्यान खींच रही है; उनके परिवार और पार्टी ने जनवरी के आखिर में उनकी आंख की बीमारी—राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (सीआरवीओ)—को लेकर चिंता जताई है।
मेमन ने पार्टी (पीटीआई) पर “अपनी लीडरशिप की रिहाई पर फोकस न करने” और इसके बजाय “अदियाला के बाहर हंगामा करने और विरोध प्रदर्शन करने” का आरोप लगाया। उन्होंने आगे कहा, “बेहतर होगा कि वे इमरान की रिहाई पर ध्यान दें।”
इमरान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और करप्शन केस में रावलपिंडी की अदियाला जेल में 14 साल की सजा काट रहे हैं। कुछ महीने पहले उन्हें सरकारी तोहफों से जुड़े एक और केस में दोषी ठहराया गया था। उन पर 9 मई, 2023 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत भी केस चल रहे हैं।
मीडिया से बात करते हुए मेमन ने आगे कहा कि पीटीआई की सोशल मीडिया टीमें “सोशल मीडिया पर और विदेशों में अपनी टीमों के जरिए नेताओं और राष्ट्रीय संस्थानों को टारगेट करती हैं।”
पीपीपी नेता ने पार्टी को “अपनी भाषा और शब्दों के चुनाव में सुधार” करने की सलाह दी और कहा कि भले ही असहमति हो सकती है, लेकिन “लोगों के परिवारों को गाली देना और घटिया भाषा का इस्तेमाल करना” ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “अपनी सोच सुधारें। इससे आपको बहुत मदद मिलेगी।”
बीते हफ्ते, पीपीपी सेंट्रल पंजाब के महासचिव सैयद हसन मुर्तजा ने पीटीआई को चेतावनी दी थी कि किसी भी तरह के चरित्र हनन का जवाब करारा दिया जाएगा।
इमरान खान की रिहाई नेशनल ही नहीं इंटरनेशनल मुद्दा भी बन गई है। हाल ही में बतौर क्रिकेटर उनके साथ खेल चुके पूर्व 14 कप्तानों ने एक खत लिखकर पाकिस्तान के हुक्मरानों से उनकी रिहाई की डिमांड की थी।
पीटीआई लगातार अपने नेता को आजाद करने की अपील कर रही है, तो वहीं सत्ता पर काबिज सियासतदां अलग-अलग जुमलों से इमरान खान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पिछले हफ्ते ही, साउथ पंजाब के अपने दौरे के दौरान अलग-अलग भाषणों में, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी इमरान की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि जेल में बंद पीटीआई लीडर को “एक मर्द की तरह” सजा का सामना करना चाहिए और उन्हें अपनी पार्टी के लीडर्स और वर्कर्स को सड़कें ब्लॉक करने का ऑर्डर नहीं देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “उन्होंने दो साल से भी कम जेल काटी है और थक चुके हैं। असल में, दो साल की जेल के बाद ही पता चलता है कि जेल असल में क्या होती है।”
वहीं, पार्टी प्रधानमंत्री के पॉलिटिकल अफेयर्स सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने टीवी पर सरकार और पीटीआई के बीच हुई डील्स का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि समाधान तक पहुंचने की कोशिश की गई थी, लेकिन इमरान “किसी भी डील” के लिए तैयार नहीं थे। इसे लेकर मीडिया ने शोर मचाया तो बड़बोले सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार को सफाई देनी पड़ी और कहना पड़ा कि ऐसी कोई डील नहीं हुई है।

