पंचायत परिसीमन पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का सख्त फैसला, 7 अप्रैल तक चुनाव रोस्टर जारी करने के आदेश

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शिमला, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत परिसीमन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया कोई भी परिसीमन अवैध माना जाएगा। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वह 7 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनावों का रोस्टर तैयार कर जारी करे।

न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। कोर्ट ने बताया कि पंचायतों के गठन, पुनर्गठन और परिसीमन की प्रक्रिया कानून के अनुसार दो चरणों में पूरी होनी चाहिए—पहले चरण में राज्य सरकार धारा 3 के तहत पुनर्गठन करती है और दूसरे चरण में उपायुक्त धारा 124 के तहत निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करते हैं।

अदालत ने चुनाव नियमों के पालन को अनिवार्य बताते हुए कहा कि परिसीमन का प्रस्ताव जारी होने के बाद 7 दिन का नोटिस देना जरूरी है, फिर 7 दिन के भीतर आपत्तियों का निपटारा किया जाए। इसके बाद 10 दिन के भीतर अपील की जा सकती है, जिस पर संभागीय आयुक्त को 15 दिन के भीतर फैसला करना होगा।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि 13 फरवरी 2026 के बाद यदि इन नियमों का पालन किए बिना परिसीमन किया गया है, तो उसे आगामी पंचायत चुनावों में लागू नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में चुनाव पुराने पंचायत क्षेत्रों के आधार पर ही कराए जाएंगे।

इसके अलावा, अदालत ने कहा कि जहां पुनर्गठन तो सही तरीके से हुआ है लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, वहां उसका प्रभाव अगले चुनाव तक टाल दिया जाएगा। केवल वही पुनर्गठन इस बार लागू होंगे, जो 13 फरवरी 2026 से पहले अधिसूचित हुए हैं और नियमों के अनुसार पूरे किए गए हैं।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि पंचायत चुनावों की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समयसीमा के भीतर पूरी की जाए। वहीं, कुछ मामलों में पुनर्गठन की वैधता से जुड़े मुद्दों पर आगे सुनवाई की गुंजाइश भी रखी गई है।