कोलकाता, 17 मार्च (आईएएनएस)। तमलुक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण सीट है, जो पूर्व मेदिनीपुर (पुरब मेदिनीपुर) जिले में स्थित है। इस क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा क्षेत्र, तमलुक, हल्दिया, महिसादल, मोयना, नंदकुमार, नंदीग्राम और पांसकुड़ा पूर्व आते हैं। ये सभी पूर्व मेदिनीपुर जिले में हैं, जो कृषि, मत्स्य पालन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
तमलुक शहर, जो जिले का मुख्यालय है, प्राचीन ताम्रलिप्ति के नाम से प्रसिद्ध रहा है। ह्वेन त्सांग जैसे चीनी यात्री ने इसका जिक्र किया था। यह शहर रूपनारायण नदी के तट पर बसा है और ऐतिहासिक महत्व रखता है।
2011 की जनगणना के अनुसार, तमलुक शहर की जनसंख्या लगभग 65,306 थी, जिसमें पुरुष 33,260 और महिलाएं 32,046 थीं। पूरे लोकसभा क्षेत्र की जनसंख्या लाखों में है, जहां ग्रामीण इलाके बहुल हैं और मतदाता मुख्य रूप से किसान, मछुआरे और छोटे व्यापारी हैं।
राजनीतिक इतिहास में तमलुक पहले कांग्रेस का गढ़ रहा, जहां 1951 में सीट बनी और शुरुआती चुनावों में कांग्रेस के समांता सतीश चंद्र जैसे नेताओं ने जीत हासिल की। बाद में सीपीआई(एम) ने यहां मजबूत पकड़ बनाई। 2009 से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का वर्चस्व रहा। 2009 में टीएमसी ने यहां जीत दर्ज की और 2014 में सुवेंदु अधिकारी ने सीपीआई(एम) के शेख इब्राहिम अली को करीब 2.46 लाख वोटों से हराया। सुवेंदु को 55.54 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सीपीआई(एम) को 40.47 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।
2019 में दिव्येंदु अधिकारी (सुवेंदु के भाई) ने टीएमसी से जीत हासिल की, उन्हें 7,24,433 वोट मिले और भाजपा के सिद्धार्थ नस्कर को 5,34,268 वोटों से हराया, अंतर 1,90,165 वोटों का रहा।
2024 के लोकसभा चुनाव में तमलुक ने बड़ा उलटफेर देखा। भाजपा के अभिजीत गंगोपाध्याय, जो पूर्व कलकत्ता हाई कोर्ट जज हैं, ने टीएमसी के देबांगशु भट्टाचार्य को 77,733 वोटों के अंतर से हराया। अभिजीत को 7,65,584 वोट (48.54 प्रतिशत) मिले, जबकि टीएमसी को 6,87,851 वोट (43.61 प्रतिशत) और सीपीआई(एम) के सायन बनर्जी को 85,389 वोट (5.41 प्रतिशत) मिले।
कुल मतदान 14,04,353 रहा और भाजपा ने टीएमसी के पारंपरिक गढ़ से सीट छीन ली। यह जीत भाजपा के लिए पूर्व मेदिनीपुर में मजबूत प्रदर्शन का प्रतीक बनी, जहां नंदीग्राम जैसे क्षेत्र पहले से ही विवादास्पद रहे हैं।
यह क्षेत्र राजनीतिक बदलाव, कांग्रेस से वामपंथी, फिर टीएमसी और अब भाजपा की बढ़ती चुनौती का गवाह रहा है।

