पश्चिम बंगाल एसआईआर विवाद: मतदाता सूची फ्रीज पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 13 अप्रैल को

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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची फ्रीज किए जाने के विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर त्वरित सुनवाई की मांग करते हुए अदालत से हस्तक्षेप की अपील की, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर 13 अप्रैल को ही विचार करेगा।

अदालत ने यह भी कहा कि वह हर दिन दाखिल होने वाले मामलों पर तुरंत आश्वासन नहीं दे सकती। इसीलिए दी गई तारीख पर ही मामले की सुनवाई होगी।

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि अपील लंबित रहने के बावजूद कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। इस पर टिप्पणी करते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि प्रभावित व्यक्तियों को स्थायी रूप से मतदान अधिकार से वंचित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय से पहले संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील ने दलील दी कि भारतीय चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को मतदाता सूची फ्रीज कर दी, जबकि कई अपीलें अभी लंबित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ मामलों में अपील स्वीकार की जा चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निर्णय प्रक्रिया में विवेक का पर्याप्त उपयोग नहीं हुआ।

इस पर पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि फ्रीजिंग के मुद्दे पर 13 अप्रैल को विस्तार से विचार किया जाएगा। याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी तर्क दिया कि चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि 9 अप्रैल के बाद किसी भी नए दावे पर विचार नहीं किया जाएगा, जबकि उनके मुवक्किल उन लोगों के समान स्थिति में हैं जिनकी अपील पहले स्वीकार हो चुकी है।

सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया है कि एक ओर चुनाव प्रक्रिया के लिए तय कट-ऑफ तारीख का पालन जरूरी है, वहीं दूसरी ओर मतदाता सूची में नाम शामिल होना और मतदान का अधिकार एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने संकेत दिया कि इन दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी, जिसमें पश्चिम बंगाल में चल रहे इस विवाद पर आगे की दिशा तय की जाएगी।