नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। इस दौरान पीएम मोदी की मौजूदगी में राज्यसभा में भाजपा सांसद लक्ष्मीकान्त बाजपेयी ने केंद्रीय मंत्री से पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़ा सवाल पूछा।
भाजपा सांसद ने अपने प्रश्न में पीएम विश्वकर्मा से जुड़े आकड़ों के बारे में जानकारी मांगी। उन्होंने यह प्रश्न श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे से किया था। प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि इस योजना में 30 लाख लोगों का पंजीकरण हो चुका है। उन्होंने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए 4 वर्षों में 30 लाख लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य था, लेकिन इसे 2 वर्षों में ही पूरा कर लिया गया।
लक्ष्मीकान्त बाजपेयी का सवाल था कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कितने लोगों का पंजीकरण हुआ, कितनों को प्रशिक्षण दिया गया और कितनों को लोन और टूलकिट वितरित की गई। साथ ही, उन्होंने ने पूछा था कि इस योजना को लेकर उत्तर प्रदेश में क्या स्थिति है।
श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने अपने उत्तर में बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और श्रमिक वर्ग को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है। इसका उद्देश्य 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को पहचान, प्रशिक्षण, टूलकिट और बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में अब तक 30 लाख लोगों का पंजीकरण हो चुका है। इनमें से 22 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं टूलकिट वितरण की बात करें तो 12 लाख लोगों को टूलकिट वितरित की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत बिना गारंटी ऋण भी दिया गया है। 5.18 लाख लाभार्थियों को अब तक यह ऋण दिया जा चुका है। श्रम और रोजगार राज्य मंत्री ने सदन में बताया कि अब तक लगभग 4,470 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में इस योजना को लेकर भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुल 1,78,081 लोगों का सफल पंजीकरण हो चुका है। इनमें से 66,901 लोगों को टूलकिट वितरित की गई है।
गौरतलब है कि यह योजना पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत करने, यह उन्हें औपचारिक पहचान देने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि यह योजना 2023 में शुरू की गई थी।
वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, पारंपरिक रूप से करोड़ों ‘विश्वकर्मा’ जो अपने हाथों, उपकरणों तथा औजारों से कठिन परिश्रम करके कुछ-न-कुछ सृजित करते हैं, वे इस देश के निर्माता हैं। हमारे पास लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई, मूर्तिकार, कारीगर, राजमिस्त्री आदि जैसे अनगिनत लोगों की एक बड़ी सूची है। इस देश ने इन सभी विश्वकर्माओं के कठिन परिश्रम को सहयोग प्रदान करने के लिए पहली बार कई प्रोत्साहन स्कीमों को शुरु किया है।
ऐसे लोगों के लिए प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी, क्रेडिट और बाजार सहायता के प्रावधान किए गए हैं। पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान, अर्थात पीएम विश्वकर्मा, से करोड़ों विश्वकर्माओं के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आएगा।

