नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। पुणे के चर्चित पोर्शे हिट-एंड-रन मामले में नाबालिग आरोपी के पिता को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए सशर्त जमानत दे दी है। पुणे के कारोबारी पर हादसे के बाद बेटे का ब्लड सैंपल बदलवाने का आरोप है।
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री और इस तथ्य को देखते हुए कि ऐसे ही मामलों में अदालत पहले भी राहत दे चुकी है, इसलिए याचिकाकर्ता को जमानत दी जा रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें लगाई हैं। जमानत के दौरान आरोपी किसी भी गवाह से सीधे या परोक्ष रूप से संपर्क नहीं करेगा। यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार जमानत रद्द कराने की मांग कर सकती है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि 19 मई 2024 बिना नंबर प्लेट की तेज रफ्तार पोर्शे कार ने पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में अनिश अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौत हो गई थी।
अश्विनी कोस्टा अनिश अवधिया के साथ सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करती थीं और वह मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की रहने वाली थीं। जांच में सामने आया कि कार 17 वर्षीय नाबालिग लड़का शराब के नशे में चला रहा था। उसके साथ दो नाबालिग दोस्त और एक ड्राइवर भी मौजूद थे। नाबालिग ने हादसे से पहले दो अलग-अलग होटलों में शराब पी थी।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि शराब पीने की बात छिपाने के लिए नाबालिग के खून का सैंपल बदल दिया गया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि पुणे के ससून अस्पताल में डॉक्टरों ने नाबालिग के खून का सैंपल फेंक दिया और उसकी जगह उसकी मां का सैंपल भेज दिया। इस कथित साजिश में नाबालिग के पिता व पुणे के कारोबारी विशाल अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है।

