पुरी के श्री लोकनाथ मंदिर में भक्तों की लंबी कतार, साल में एक बार होते हैं अद्भुत दर्शन

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पुरी, 13 फरवरी (आईएएनएस)। उड़ीसा के पुरी में भगवान शिव के प्राचीन श्री लोकनाथ मंदिर में विजया एकादशी के मौके पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है।

भक्त भगवान शिव के सबसे पवित्र रूपों में से एक के दर्शन के लिए ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर के प्रांगण में लंबी लाइनों में लगे हैं। भक्त मंदिर परिसर में बने पवित्र कुंड में स्नान कर रहे हैं।

श्री लोकनाथ मंदिर, जगन्नाथ मंदिर के पास बना, सबसे प्राचीन मंदिरों में शामिल है, जहां हर साल की तरह इस साल भी महाशिवरात्रि से दो दिन पहले पंकोद्धारा अनुष्ठान की परंपरा निभाई जा रही है। भक्तों के बीच पंकोद्धारा नीति का बहुत महत्व है क्योंकि माना जाता है कि आज के दिन भक्तों को बाबा के सबसे पवित्र रूप के दर्शन करने का मौका मिलता है।

मंदिर के पुजारी शशांक शेखर महापात्रा ने आईएएनएस से कहा, “न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में, सभी शिव मंदिरों में से, यह एकमात्र मंदिर है जहां यह पर्व मनाया जाता है। पंकोद्धारा एकादशी का मतलब है, ‘भगवान शिव के पहले दर्शन।’ बाकी दिनों बाबा की चरित्र प्रतिमा के दर्शन करने का मौका मिलेगा, लेकिन आज के दिन बाबा के पूर्ण रूप के दर्शन किए जाते हैं।”

माना जाता है कि आज एकादशी के दिन बाबा के दर्शन करने से 1 लाख शिवलिंग के दर्शन करने का पुण्य मिलता है और दर्शन सिर्फ शरीर नहीं, आत्मा तक को छू लेते हैं। इसे आत्मशुद्धि का दर्शन भी कहा जाता है। मंदिर की व्यवस्था पर बात करते हुए पुजारी ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दो लाइनों की व्यवस्था की गई है और पुलिस प्रशासन और मंदिर प्रशासन मिलकर भक्तों को सुलभ दर्शन कराने का प्रयास कर जा रहे हैं। पंकोद्धारा अनुष्ठान से दिन शिवलिंग पर जमे पानी को साफ करने का काम करते हैं और आस-पास जमा फूल और गंदगी को भी हटाते हैं।

बता दें कि श्री लोकनाथ मंदिर उड़ीसा का सबसे प्राचीन मंदिर है, जहां शिवलिंग हमेशा पानी में डूबा रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, लोकनाथ शिवलिंग को भगवान राम का रूप माना जाता है और शिवलिंग की स्थापना भी भगवान राम ने की थी। मंदिर में मौजूद तालाब भी आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि तालाब में स्नान करने से शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है। महाशिवरात्रि के दिन भी पवित्र कुंड में स्नान करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।