दौसा, 11 मार्च (आईएएनएस)। राजस्थान की रेतीली धरती हमेशा से ही रहस्यों और कहानियों से भरी रही है और ऐसी ही एक जगह है चांद बावड़ी। दौसा जिले के छोटे से आभानेरी गांव में स्थित यह चांद बावड़ी अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और रहस्यमयी कहानियों के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। इस बावड़ी के बारे में कहा जाता है कि यहां कभी एक पूरी बारात उतरी थी जो कभी बाहर नहीं लौटी।
चांद बावड़ी का निर्माण 8वीं-9वीं शताब्दी में निकुम्भ वंश के राजा चांद ने कराया था। यह बावड़ी लगभग 19.5 मीटर गहरी है और इसमें कुल 1300 सीढ़ियां बनाई गई हैं। इसकी बनावट ऐसी है कि इसे ‘भूल-भुलैया’ भी कहा जाता है। प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में है और नीचे उतरने के लिए तीन दिशाओं में डबल सीढ़ियां बनाई गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति जिस सीढ़ी से पानी तक जाता है, वह आसानी से उसी रास्ते से वापस नहीं आ सकता।
लेकिन चांद बावड़ी की सबसे डरावनी और रहस्यमयी कहानी है उस गायब हो गई बारात की। यहां के बुजुर्गों का कहना है कि सदियों पहले एक बारात बावड़ी के अंदर उतरी थी। उस बारात में शामिल लोग बावड़ी की गहराई में ऐसे खो गए कि आज तक कोई बाहर नहीं लौटा। हालांकि, इतिहासकार इसे केवल कल्पना मानते हैं, लेकिन यह कहानी आज भी पर्यटकों की जिज्ञासा को बढ़ाती है।
चांद बावड़ी की अद्भुतता सिर्फ उसकी गहराई या सीढ़ियों में नहीं है, बल्कि इसके स्तंभों और मंडपों में भी देखने को मिलती है। उत्तर दिशा में बने स्तंभों पर बहुमंजिली दीर्घा और महिषासुरमर्दिनी व गणेश जी की मूर्तियां इसे और आकर्षक बनाती हैं। वहीं, स्थानीय मान्यता है कि चांदनी रात में जब चंद्रमा की रोशनी बावड़ी पर पड़ती है, तो यह पूरी तरह से जगमगा उठती है और देखने वाले लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
आज यह ऐतिहासिक धरोहर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा सुरक्षित रखी जा रही है। पर्यटक सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही इस बावड़ी का भ्रमण कर सकते हैं और यहां उतरते हुए रहस्य, इतिहास और वास्तुकला का अनूठा संगम महसूस कर सकते हैं।

