नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक और उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, मंत्रालय ने अपने पूंजीगत बजट का पूर्ण उपयोग कर लिया है। यह बजट राशि 1.86 लाख करोड़ रुपए थी। इस बड़े पूंजीगत व्यय का 100 प्रतिशत उपयोग किया गया।
यह लगातार दूसरा साल है जब रक्षा मंत्रालय ने अपना पूरा कैपिटल बजट इस्तेमाल किया है। इससे पहले भी वित्त वर्ष 2024-25 में कई वर्षों बाद पहली बार पूंजीगत बजट का पूरा उपयोग किया गया था। वहीं ओवरऑल देखे तो वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा मंत्रालय के पूरे बजट का 99.62 प्रतिशत उपयोग हुआ है। हालांकि इसमें नागरिक व्यय और पेंशन भी शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक शुरुआत में पूंजीगत व्यय के लिए 1.80 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, लेकिन पहली दो तिमाहियों के खर्च और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेनाओं की बढ़ी हुई जरूरतों को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने इसे बढ़ाकर 1.86 लाख करोड़ रुपए कर दिया था। इस खर्च का बड़ा हिस्सा आधुनिक सैन्य उपकरणों की खरीद पर किया गया है। सबसे ज्यादा खर्च लड़ाकू विमान और उनके इंजन की खरीद पर हुआ।
इसके अलावा जमीन पर इस्तेमाल होने वाले हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, गोला-बारूद, जहाज बनाने और अन्य सैन्य उपकरणों पर भी बड़ा खर्च किया गया। सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ, जैसे मल्टी रोल फाइटर विमान, लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, नौसेना के खास जहाज और मिसाइल सिस्टम।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस तरह का प्रभावी खर्च न केवल सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को गति देगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को भी मजबूत करेगा। इसके अलावा, इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा क्योंकि पूंजीगत खर्च का प्रभाव कई क्षेत्रों में दिखाई देता है, जिससे निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रक्षा मंत्रालय ने 109 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की थी। इनकी कुल लागत 6.81 लाख करोड़ रुपए है। यह वर्ष 2024-25 की तुलना में काफी अधिक है, तब 56 प्रस्तावों को 1.76 लाख करोड़ रुपए की लागत के साथ मंजूरी दी गई थी।
इसके साथ ही, 2025-26 में कुल 503 पूंजीगत खरीद अनुबंध भी किए गए, जिनकी कुल राशि 2.28 लाख करोड़ रुपए रही। वहीं आगे की तैयारी भी जारी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने रक्षा मंत्रालय को 2.19 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत बजट दिया है। यह पिछले साल से करीब 22 प्रतिशत ज्यादा है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सेना को और ज्यादा आधुनिक और मजबूत बनाने पर जोर रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार अब रक्षा क्षेत्र में सिर्फ पैसा दे ही नहीं रही, बल्कि उसे पूरी तरह सही जगह और समय पर खर्च भी कर रही है, जिससे देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा हो रहा है।


