राष्ट्रीय किसान मेला-सह-प्रदर्शनी: खेती सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि किसान की जान है: रामकृपाल यादव

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भागलपुर, 17 मार्च (आईएएनएस)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेला-सह-प्रदर्शनी 2026 के दूसरे दिन मंगलवार को किसानों, कृषि उद्यमियों, विद्यार्थियों एवं कृषि में रुचि रखने वाले लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। पूरे परिसर में उत्साह, नवाचार और ज्ञान-विनिमय का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

दिन की शुरुआत अतिथियों के आगमन से हुई, जिसके बाद उद्घाटन, प्रदर्शनी अवलोकन, प्रकाशनों का विमोचन, उत्पाद लोकार्पण, पुरस्कार वितरण तथा तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया।

मुख्य कार्यक्रम में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री सह परिवहन मंत्री श्रवण कुमार, कृषि मंत्री रामकृपाल यादव, भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल, बिहार विधान परिषद के सदस्य डॉ. एनके यादव, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। सभी अतिथियों का स्वागत सिंदूर के पौधे एवं अंगवस्त्र देकर किया गया।

अतिथियों ने मेले का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने पुष्प प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार के आकर्षक फूलों का अवलोकन किया तथा उद्यान एवं कृषि मंडप का निरीक्षण किया, जिसका थीम ‘शोध से समाधान’ रखा गया है। उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे अनुसंधानों को देखा और उनकी सराहना की। साथ ही, मिलेट आधारित विभिन्न उत्पादों का अवलोकन एवं परीक्षण भी किया।

मेले का एक विशेष आकर्षण नीलगाय पर चल रहा शोध रहा। अतिथियों ने नीलगाय के व्यवहार परिवर्तन का अवलोकन किया और पाया कि यह अपेक्षाकृत मिलनसार व्यवहार प्रदर्शित कर रही है, जो भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि किसान खेत की जान है एवं इस देश की शान है। बिहार की 76 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में कृषि से जुड़ी है, इसलिए किसानों की समृद्धि ही राज्य की समृद्धि का आधार है।” उन्होंने सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति एवं उनकी टीम की सराहना की।

अध्यक्षीय संबोधन में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, “किसानों की आय वृद्धि के लिए उन्नत तकनीक एवं कृषि आधारित उद्यमों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच अनुसंधान आधारित समाधान और प्रशिक्षण ही स्थायी विकास का आधार है।” उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा इस दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

वहीं, कुलपति प्रो. (डॉ.) डीआर सिंह ने कहा, “देश के विकास के लिए राज्यों का विकास आवश्यक है और बिहार का विकास किसानों की उन्नति से ही संभव है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक नई तकनीकों के विकास में निरंतर जुटे हुए हैं।”

कार्यक्रम के दौरान कृषि उद्यमी सम्मान प्रदान किए गए, जिनमें खगड़िया की इंदु कुमारी, बांका की रिंकू देवी, जमुई के अर्जुन मंडल, रोहतास के उत्कर्ष सिंह, भागलपुर के चंदन कुमार, मुंगेर के राजेश कुमार एवं अन्य प्रगतिशील किसान शामिल रहे।

एक अनूठे आयोजन के तहत बीएयू के छात्रों द्वारा जीआई उत्पादों पर आधारित रैम्प वॉक प्रस्तुत किया गया, जिसमें मखाना, जर्दालू आम, मगही पान, कतरनी धान, लीची के साथ-साथ संभावित जीआई उत्पाद जैसे ठेकुआ एवं खाजा को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित एआई आधारित फिल्म ‘उन्नत कृषि उज्ज्वल बिहार’ का भी लोकार्पण किया गया। साथ ही, नवाचारी वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया, जिनमें डॉ. अहमर आफताब, डॉ. आर.वी.पी. निराला, डॉ. शिवनाथ दास, डॉ. शाजिदा बानो, डॉ. चंदन कुमार पांडा, डॉ. सरिता नाहकपम, डॉ. आदित्य कुमार एवं डॉ. अनिल कुमार शामिल रहे।

डॉ. दीपक पटेल को प्रतिष्ठित डॉ. जी. त्रिवेदी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण निदेशक शोध डॉ. अनिल कुमार सिंह ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एस. के. पाठक ने किया।

कार्यक्रम के दौरान ‘मखाना बोलेगा और बिहार गाएगा’ प्रतियोगिता के विजेताओं की भी घोषणा की गई, जिसमें मखाना पर सबसे अच्छे गीत, कविता और कथन लिखने वाले को सम्मानित किया गया।

दूसरे दिन का एक प्रमुख आकर्षण पशु प्रदर्शनी रही, जिसमें विभिन्न नस्लों के कुत्तों—जर्मन शेफर्ड, पामेरियन, डोबरमैन, लैब्राडोर आदि—के साथ-साथ खरगोश, मुर्गा, कबूतर एवं अन्य पशु-पक्षियों का प्रदर्शन किया गया। हिमालयन एवं पर्शियन बिल्लियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लोगों के आकर्षण का केंद्र एक गोट कार्ट या बकरी गाड़ी थी जिसमें बैल गाड़ी की तरह बकरी छोटी सी गाड़ी भली-भाती चलाते हुए नजर आई। अच्छे नस्ल के घोड़े ने भी लोगों को खूब लुभाया।

संध्या काल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने प्रस्तुतिकरण से मेले में समा बांध दी।