नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डेक्कन डिजिटल नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के कथित उल्लंघन के मामले में कंपाउंडिंग ऑर्डर जारी कर दिया है।
यह आदेश 14 जनवरी 2026 को फेमा की धारा 15 के तहत पारित किया गया। इस आदेश के साथ ही कंपनी के खिलाफ चल रही आगे की कानूनी कार्रवाई समाप्त हो गई है। यह फैसला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ‘नो ऑब्जेक्शन’ दिए जाने के बाद लिया गया।
मामले की शुरुआत उस समय हुई थी, जब प्रवर्तन निदेशालय को विश्वसनीय जानकारी के आधार पर फेमा नियमों के उल्लंघन की आशंका हुई। जांच पूरी होने के बाद ईडी ने 27 दिसंबर 2012 को फेमा की धारा 16 के तहत संबंधित प्राधिकरण के समक्ष कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में विदेशी निवेश से जुड़ी रिपोर्टिंग में देरी का आरोप लगाया गया था।
जांच में पाया गया कि कंपनी ने लगभग 11.82 करोड़ रुपए की विदेशी राशि प्राप्त होने की जानकारी समय पर दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा, शेयर जारी करने के बाद आवश्यक एफसीजीपीआर फॉर्म भी निर्धारित समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं किया गया। फेमा नियमों के तहत इन प्रक्रियाओं को तय समय में पूरा करना अनिवार्य होता है।
इन आरोपों के आधार पर 16 जनवरी 2013 को कंपनी और उस समय के जिम्मेदार निदेशकों तथा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद कंपनी ने फेमा की धारा 15 के तहत मामले के निपटारे के लिए आरबीआई के समक्ष कंपाउंडिंग आवेदन दायर किया।
आरबीआई के अनुरोध पर ईडी ने मामले की समीक्षा कर कंपाउंडिंग के लिए अपनी आपत्ति न होने की पुष्टि की। इसके बाद आरबीआई ने 1,03,333 रुपए की एकमुश्त राशि के भुगतान पर मामले को निपटा दिया। इस आदेश के साथ ही कंपनी के खिलाफ फेमा, 1999 के तहत चल रही अधिनिर्णय कार्यवाही और संभावित मुकदमेबाजी समाप्त हो गई है।

