जयपुर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। जयपुर में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर खुशी जताई है, लेकिन साथ ही कुछ अहम बातें भी सामने रखी हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा राजावत, वंदना व्यास और पारुल भार्गव ने इस बिल को महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बताया, लेकिन यह भी कहा कि असली चुनौती इसे सही तरीके से लागू करने की होगी।
मनीषा राजावत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह बिल बहुत लंबे इंतजार के बाद आया है और इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना था कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं चाहे वह सामाजिक क्षेत्र हो, आर्थिक क्षेत्र हो या फिर रोजगार का क्षेत्र। ऐसे में राजनीति में भी उनकी भागीदारी बढ़ाना बहुत जरूरी था। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है और अब उन्हें उनका अधिकार मिल रहा है।
मनीषा ने कहा कि अब समय बदल रहा है। पहले महिलाएं सिर्फ नौकरी लेने वाली मानी जाती थीं, लेकिन अब वे रोजगार देने वाली बन रही हैं। इसी तरह अब वे नीति निर्माण में भी अपनी मजबूत भूमिका निभाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं की संख्या काफी बढ़ेगी और इससे देश की दिशा और भी सकारात्मक होगी।
वहीं वंदना व्यास ने कहा कि अभी संसद में महिलाओं की भागीदारी करीब 14-15 प्रतिशत ही है, जबकि देश की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है। ऐसे में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना एक बड़ा और जरूरी कदम है।
वंदना ने बताया कि जब पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण मिला था, तब भी शुरुआत में कई तरह की चुनौतियां थीं, लेकिन धीरे-धीरे इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से साफ-सफाई, पीने के पानी, बच्चों की शिक्षा जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया गया और कई सुधार देखने को मिले। उनका मानना है कि अगर यही मॉडल संसद और विधानसभा में लागू होगा, तो महिलाओं और बच्चों से जुड़े विकास के सूचकांकों में काफी सुधार आएगा।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ आरक्षण देना ही काफी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि महिलाएं स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। कई बार ऐसा देखा गया है कि महिला प्रतिनिधि के पीछे असल में कोई और निर्णय लेता है। इसलिए जरूरी है कि महिलाओं को सही मायनों में सशक्त बनाया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव या हस्तक्षेप के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।
इसी कड़ी में पारुल भार्गव ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि यह बिल महिलाओं के लिए एक बहुत ही सकारात्मक पहल है। उन्होंने भारत सरकार को बधाई देते हुए कहा कि यह कदम महिलाओं की हिस्सेदारी को बढ़ाने की दिशा में बहुत अहम है। उनका मानना है कि अब संसद और विधानसभा में महिलाओं की आवाज पहले से ज्यादा मजबूत होगी और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर का मौका मिलेगा।
पारुल ने यह भी कहा कि कई बार इस तरह के बिलों को लेकर अलग-अलग तरह की बातें होती हैं, लेकिन अगर सरकार महिलाओं को आगे लाने के लिए कोई कदम उठाती है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर महिलाएं खुद आगे आकर काम करेंगी, तो उसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

