शरीर और मन दोनों को दें संतुलन, योग से पाएं पीसीओएस पर नियंत्रण

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नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं में पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) काफी आम हो गया है। ये सिर्फ हार्मोन का नहीं है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के खाने, लाइफस्टाइल और स्ट्रेस का परिणाम होता है। आयुर्वेद में पीसीओएस मैनेजमेंट के लिए योग को एक नेचुरल और असरदार तरीका माना जाता है।

योग सिर्फ शरीर को फॉर्म में रखने का काम नहीं करता है, बल्कि ये शरीर और मन दोनों को संतुलन देता है। पीसीओएस में हार्मोन असंतुलन, वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड्स और तनाव जैसी समस्याएं होती हैं। योग इन सभी चीजों पर धीरे-धीरे असर डालता है।

सबसे पहले, योग आपके रक्त संचार को बेहतर बनाता है। जब ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, तो आपके अंगों और टिश्यूज को सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं। इससे आपके हार्मोनल बैलेंस में सुधार आता है। योग से मेटाबॉलिज्म भी बढ़ता है। सही पोज और स्ट्रेचिंग से आपका शरीर कैलोरी को बेहतर तरीके से बर्न करता है और वजन नियंत्रित रहता है।

पीसीओएस में तनाव बहुत बड़ा फैक्टर होता है। तनाव हार्मोन असंतुलन को और बढ़ा देता है। ऐसे में योग का सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह मन और शरीर दोनों को रिलैक्स करता है। प्राणायाम और ध्यान के जरिए आप अपने दिमाग को शांत कर सकती हैं, जिससे तनाव कम होता है और नींद भी बेहतर आती है।

कुछ योगासन खास तौर पर पीसीओएस के लिए बहुत फायदेमंद हैं। धनुरासन आपके पेट और पीठ के निचले हिस्से को स्ट्रेच करता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और हार्मोन संतुलन में मदद करता है। भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और पेट के अंगों को एक्टिव करता है। वहीं बद्ध कोणासन हिप्स और गुदा के आसपास के ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और पीरियड्स में होने वाले दर्द को कम करता है।

योग सिर्फ फिजिकल फिटनेस के लिए नहीं है। यह आपको अपने शरीर के साथ कनेक्ट होने का तरीका भी सिखाता है। जब आप नियमित रूप से योग करती हैं, तो आपका शरीर और मन दोनों ही संतुलित रहते हैं।