नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। मार्च का महीना शुरू होने में बहुत कम समय बचा है, लेकिन अभी से दोपहर के समय मौसम गर्म होने लगा है।
मार्च के बाद गर्मी अपने चरम पर होगी और वात और पित्त को संतुलित करने के लिए ठंडे पेय पदार्थों का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव को अर्पित किया जाने वाला बेल का फल न सिर्फ स्वाद में अच्छा होता है, बल्कि उसके अंदर औषधीय से भरपूर गुण हैं?
भारतीय परंपरा में बेल केवल एक फल या वृक्ष नहीं, बल्कि अध्यात्म और आयुर्वेद का संगम है। गर्मियों में शरीर को शीतल रखने से लेकर पाचन सुधारने तक, बेल का उपयोग हजारों वर्षों से किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे दीपन, पाचन, ग्रहणी-नाशक और बल्य बताया गया है। बेल का सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि पत्ते, छाल और जड़ का अपना महत्व है, जिसका उपयोग चिकित्सक बेहतर तरीके से बता सकते हैं।
अगर शरीर पर किसी तरह की सूजन है तब भी बेल का रस आराम दिलाने में मदद करेगा। बेल में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल तत्व शामिल होते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने का काम करते हैं। इसके साथ ही अगर पाचन से जुड़ी कब्ज या पेट में जलन और अल्सर की परेशानी है, तब भी बेल का सेवन लाभकारी है। बेल आंतों को साफ करने और ब्लूकेट करने में मदद करता है। अगर बेल का रस पीना पसंद नहीं है तो बाजार में बेल का चूर्ण मिल जाता है जिसके सेवन से कब्ज और दस्त की परेशानी में फायदा मिलेगा।
बेल ब्लड शुगर को भी सपोर्ट करता है। बेल के पत्तों का अर्क ग्लूकोज और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है, जिससे रक्त में शुगर की मात्रा नहीं बढ़ती है। हालांकि बेल के पत्तों के अर्क के सेवन से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
अब जान लेते हैं कि बेल के रस का सेवन कैसे करना चाहिए और किन लोगों को बेल के रस का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। बेल का सेवन करने के लिए बेल के गूदे को पानी में हाथों से मसलने के बाद उसे छानकर मिश्री मिलाकर पीएं। बेल का सेवन सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है। इसके साथ ही शुगर के मरीज और गर्भवती महिलाओं को सेवन से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।

